बीना (सागर)। देवल पंचायत के सरपंच लाखन सिंह यादव की हत्या ने सियासत को गर्मा दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जो 15 सितंबर को दोपहर 1 बजे ग्राम देवल पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगी और मौके की परिस्थितियों का अध्ययन करेगी। समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेगी।

क्या है पूरा मामला
4 सितंबर की शाम करीब 5:30 बजे बीना विधानसभा क्षेत्र के भानगढ़ रोड पर सरपंच लाखन सिंह यादव की सफारी वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अगले ही दिन गांव के दो निवासियों सोवरन यादव और सुरेंद्र यादव को गिरफ्तार किया।
लेकिन परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना में केवल दो ही लोग शामिल नहीं थे। 7 सितंबर को परिजनों और ग्रामीणों ने एसडीओपी कार्यालय का घेराव किया और अन्य आरोपियों के नाम भी FIR में जोड़ने की मांग की।
इसके बाद 9 सितंबर को सरपंच संघ भी मैदान में आया और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग प्रशासन से रखी।

शव तीन घंटे तक मौके पर पड़ा रहा
इस वारदात ने प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए। घटना के बाद मृतक का शव करीब तीन घंटे तक मौके पर ही पड़ा रहा, जिससे ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया।

कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
जिला कांग्रेस प्रवक्ता आशीष ज्योतिषी ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई समिति में
- पूर्व विधायक घनश्याम सिंह,
- विधायक देवेंद्र पटेल,
- और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी यादवेन्द्र सिंह यादव शामिल हैं।
इसके अलावा जिला कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा, पूर्व मंत्री प्रभुसिंह ठाकुर और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव भी टीम के साथ रहेंगे।
यह दल न केवल परिजनों से मुलाकात करेगा बल्कि घटना स्थल, ग्रामीणों की बातें और पुलिस कार्रवाई की स्थिति का भी जायजा लेगा।

सियासी असर और आगामी कदम
बीना विधानसभा क्षेत्र में सरपंच की हत्या को लेकर पहले से ही गंभीर असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हत्या सामाजिक व राजनीतिक रंजिश का परिणाम है। ऐसे में कांग्रेस का सक्रिय होना आने वाले समय में इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक स्वरूप दे सकता है।
कांग्रेस की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। संभव है कि रिपोर्ट के बाद प्रदेश स्तर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाएं और विधानसभा में भी इसे मुद्दा बनाया जाए।