इंदौर के बाद जबलपुर में भी लापरवाही उजागर, डीन बोले- “मामूली घटना”
जबलपुर।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाने वाली शर्मनाक घटनाएं मध्यप्रदेश के बड़े अस्पतालों में थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इंदौर एमवाय अस्पताल में नवजातों की मौत के बाद अब जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां मानसिक रोग विभाग में भर्ती दो मरीजों को चूहों ने कुतर डाला।

वार्ड में चूहों का कब्जा
परिजनों के मुताबिक, वार्ड के अंदर लंबे समय से चूहों का आतंक है। सिहोरा निवासी 25 वर्षीय रजनी यादव और गोटेगांव निवासी 50 वर्षीय सरोज मेहरा इस लापरवाही का शिकार बनीं। दोनों के पैरों पर गहरे निशान पड़े हैं। रजनी को तीन इंजेक्शन लगाए गए, जबकि सरोज की एड़ियों को चूहों ने कई बार कुतरा।
डॉक्टर और स्टाफ की बेरुखी
मरीजों ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद डॉक्टर और नर्सों ने लापरवाही बरती। रजनी के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने सिर्फ इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी और चूहों को रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए। सरोज मेहरा के बेटे ने तो यहां तक कहा कि रात ही नहीं, दिन में भी वार्ड के अंदर बड़े-बड़े चूहे घूमते रहते हैं।

रेनोवेशन के बीच अस्थाई व्यवस्था
जानकारी के अनुसार मानसिक रोग विभाग का भवन फिलहाल रेनोवेशन के कारण बंद है। इसलिए मरीजों को अस्थि रोग विभाग के भवन में शिफ्ट किया गया है। घटना इसी अस्थायी वार्ड में हुई।
डीन का बयान— “मामूली घटना”
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने इसे “मामूली घटना” बताते हुए कहा कि—
- दोनों मरीजों को तुरंत इलाज दिया गया और डिस्चार्ज कर दिया गया है।
- वार्ड में पेस्ट कंट्रोल के लिए दवाएं रखी गई हैं।
- ठेका कंपनी को चूहों पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन डीन के इस बयान से मरीजों के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ “मामूली घटना” नहीं बल्कि लापरवाही का गंभीर मामला है, क्योंकि इससे मरीजों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
इंदौर से जबलपुर तक सवाल
यह घटना इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहले इंदौर एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से नवजातों की मौत हुई थी। उस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। अब जबलपुर में हुई यह घटना प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर गहरे सवाल खड़े कर रही है।

जांच और पेस्ट कंट्रोल के आदेश
फिलहाल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अधीक्षक ने मौके का निरीक्षण किया और ठेका कंपनी को तुरंत पेस्ट कंट्रोल के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन परिजन सवाल उठा रहे हैं कि—
- जब इंदौर की घटना के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश दिए थे, तो जबलपुर में एहतियाती इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
- आखिर क्यों मरीजों की सुरक्षा को हल्के में लिया जा रहा है?
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों को दोषी ठहराने के बजाय प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए।