दिग्विजय सिंह का CM को पत्र: बोले- “जनसुनवाई योजना मजाक बन गई है

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जनसुनवाई की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने की तीखी टिप्पणी, लिखा- “अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं, जनता को मिल रहा अपमान”

सागर।
प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जनसुनवाई योजना को लेकर बहस छिड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखते हुए इस योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि यह योजना, जिसे कभी गरीब और वंचित वर्ग के लिए न्याय की आशा के रूप में शुरू किया गया था, अब “महज दिखावा” बनकर रह गई है।


पत्र में उठाए सवाल

अपने पत्र में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि सरकार ने इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया, विज्ञापनों पर जनता का पैसा खर्च किया, लेकिन हकीकत यह है कि अफसरों की संवेदनहीनता और जनता की समस्याओं के प्रति लापरवाह रवैये के कारण यह पूरी व्यवस्था चरमराती नज़र आ रही है।

उन्होंने साफ कहा कि अगर अधिकारी सचमुच संवेदनशील होते और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सक्रिय रहते, तो यह योजना लोगों के लिए सहारा साबित होती। लेकिन आज स्थिति यह है कि लोग अपमानित और निराश होकर आत्महत्या तक का प्रयास करने लगे हैं।


सागर की जनसुनवाई का उल्लेख

दिग्विजय सिंह ने हाल ही में 9 सितंबर को सागर कलेक्टर कार्यालय में हुई जनसुनवाई की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस योजना की वास्तविकता को उजागर करती है—

  • खजरा गांव के दिव्यांग अर्जुन सिंह लोधी को प्रमाण पत्र न मिलने की शिकायत पर मजबूरी में सड़क पर लेटना पड़ा।
  • बरोदिया कलां के सुरेश कुशवाह प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी समस्या लेकर पहुंचे, लेकिन अफसरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्हें फूल-मालाएं चढ़ानी पड़ीं।
  • सुआतला गांव के किसान हेमराज पटेल फसल मुआवजा न मिलने पर जनसुनवाई के बीच फूट-फूटकर रो पड़े।

दिग्विजय ने कहा कि ऐसी घटनाएं जनता के आक्रोश और बेबसी की गवाही देती हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।


आत्महत्या के प्रयासों का जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में कलेक्टोरेट परिसर में घटित पुरानी घटनाओं को भी गिनाया।

  • 8 माह पहले एक महिला ने अवैध कब्जा हटाने की मांग पूरी न होने पर फांसी लगाने की कोशिश की थी।
  • अगस्त 2025 में एक महिला ने सुनवाई न होने से तंग आकर स्वयं पर केरोसिन डालकर आत्महत्या का प्रयास किया।
  • अभयराज नामक व्यक्ति ने भी कलेक्टर कार्यालय के सामने जान देने की कोशिश की।

उन्होंने लिखा कि ये घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता नहीं है।


“जनसुनवाई अब मजाक बन चुकी है”

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा—

“यह साफ हो गया है कि सरकार ने संवेदनशीलता खो दी है। अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। जनसुनवाई योजना अब मजाक बनकर रह गई है।”


मुख्यमंत्री से की मांग

पत्र के अंत में दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से दो टूक शब्दों में मांग की है—

  • या तो इस योजना को पूरी तरह बंद कर दिया जाए, ताकि जनता को निराशा का सामना न करना पड़े।
  • या फिर इसे सार्थक और प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे संवेदनशीलता से शिकायतें सुनें और त्वरित कार्रवाई करें।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जनता को सड़क पर लेटने या आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाने से कोई रोक नहीं पाएगा।

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