मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को दो जिलों—गुना और सीधी—में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। इस दौरान गुना में चर्चित हवाला/कैश मामले में पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया, जबकि सीधी जिले में कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को भी पद से हटाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सीधी जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पीएस धनवाल को निलंबित कर दिया गया।
गुना जिले में यह कार्रवाई हाल ही में सामने आए एक बड़े नकदी लेनदेन (हवाला) मामले के बाद की गई, जिसमें करीब 1 करोड़ रुपए कैश बरामद होने की बात सामने आई थी। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री ने SP अंकित सोनी की कार्यप्रणाली को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद उन्हें तत्काल हटाने का निर्णय लिया गया। इस कदम को सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत देखा जा रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार या लापरवाही पर सीधे कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सीधी जिले में मुख्यमंत्री के आकस्मिक दौरे के दौरान आम जनता और जनप्रतिनिधियों से प्रशासन को लेकर कई शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों के आधार पर जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई, जिसमें कई कमियां सामने आईं। इसके बाद कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को हटाने का फैसला लिया गया। साथ ही, जिला सहकारी बैंक में अनियमितताओं और कामकाज में गड़बड़ी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महाप्रबंधक पीएस धनवाल को निलंबित कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सीधी में लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही, जनता की समस्याओं के निराकरण में देरी और विभागीय समन्वय की कमी को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान ये मुद्दे खुलकर सामने आए, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई।
यह पूरी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस कदम को प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।