मध्य प्रदेश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। पिछले छह महीनों में प्रदेश में 17 से ज्यादा अलग-अलग तरीकों से ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साइबर अपराधी हर बार अपना पैटर्न इतनी तेजी से बदल लेते हैं कि साइबर पुलिस और विशेषज्ञों को समझने और उससे बचाव का तरीका तैयार करने से पहले ही नया फ्रॉड शुरू हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर फ्रॉड करने वाले अब तकनीक का बेहद चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले जहां लोगों को बैंक कॉल, लॉटरी या ओटीपी के जरिए ठगा जाता था, वहीं अब एपीके (APK) फाइल्स, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, ऑनलाइन लोन और सोशल मीडिया हैकिंग जैसे कई हाईटेक तरीके सामने आ चुके हैं।
APK फाइल बना नया हथियार
साइबर ठगों का सबसे खतरनाक और तेजी से फैलता तरीका APK फाइल्स के जरिए फ्रॉड करना बन गया है। APK फाइल दरअसल एंड्रॉयड एप्लिकेशन इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। साइबर अपराधी इसे शादी के निमंत्रण कार्ड, बधाई संदेश, RTO ई-चालान या किसी जरूरी दस्तावेज के रूप में भेजते हैं।
जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड या ओपन करता है, उसके मोबाइल का एक्सेस साइबर ठगों के पास पहुंच जाता है। इसके बाद वे मोबाइल का डेटा, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और ओटीपी तक हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में मोबाइल पूरी तरह हैक हो जाता है।
खाली खाते वाले लोग भी बन रहे शिकार
साइबर ठगी को लेकर आम धारणा यह रहती है कि केवल उन्हीं लोगों को निशाना बनाया जाता है जिनके खाते में पैसा होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ठग उन लोगों को भी निशाना बना रहे हैं जिनके बैंक खाते खाली पड़े हैं।
साइबर अपराधी ऐसे लोगों का डेटा चोरी कर उनके नाम पर ऑनलाइन लोन निकाल लेते हैं। पीड़ित को तब पता चलता है जब उसके मोबाइल पर ईएमआई या लोन की किस्त जमा करने के मैसेज आने लगते हैं। कई लोग तब तक समझ ही नहीं पाते कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी लोन लिया जा चुका है।
डिजिटल अरेस्ट से डराकर ठगी
पिछले कुछ महीनों में “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी का बड़ा तरीका बनकर सामने आया है। इसमें ठग खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अफसर, साइबर सेल अधिकारी या कोर्ट अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं।
वे लोगों को बताते हैं कि उनका बैंक खाता किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है या उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसके बाद डराकर उन्हें घंटों वीडियो कॉल पर रोके रखते हैं और बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।

कई मामलों में लोगों को यह तक कह दिया जाता है कि वे किसी से बात न करें, क्योंकि वे “निगरानी” में हैं। डर और घबराहट में लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं।
जॉब, इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग फ्रॉड
साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए फर्जी नौकरी और निवेश योजनाएं भी चला रहे हैं। लोगों को घर बैठे कमाई, पार्ट टाइम जॉब या शेयर मार्केट में मोटा मुनाफा दिलाने का लालच दिया जाता है।
शुरुआत में थोड़ी रकम वापस करके लोगों का भरोसा जीता जाता है, फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर ठग फरार हो जाते हैं। कई मामलों में फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और वेबसाइट्स भी बनाई जा रही हैं।
साइबर पुलिस के लिए चुनौती
साइबर एक्सपर्ट धर्मेन्द्र शर्मा के अनुसार साइबर फ्रॉड करने वाले बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं। वे हर कुछ दिनों में अपना तरीका बदल लेते हैं। एक फ्रॉड की चेन कई राज्यों और कई देशों तक फैली होती है। ऐसे में अपराधियों तक पहुंचना आसान नहीं होता।
उन्होंने बताया कि जब तक पुलिस किसी एक तरीके को लेकर लोगों को जागरूक करती है, तब तक ठग नया तरीका अपना लेते हैं। यही वजह है कि साइबर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
इन 17 तरीकों से हो रही ठगी
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में जिन प्रमुख तरीकों से साइबर फ्रॉड हो रहे हैं, उनमें शामिल हैं—
- APK फाइल फ्रॉड
- डिजिटल अरेस्ट
- फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम
- ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप फ्रॉड
- फिशिंग लिंक
- विशिंग कॉल
- फर्जी बैंक अधिकारी कॉल
- सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग
- OLX और ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड
- QR कोड स्कैम
- KYC अपडेट फ्रॉड
- फर्जी लोन ऐप
- पार्ट टाइम जॉब स्कैम
- फर्जी कूरियर और पार्सल कॉल
- UPI फ्रॉड
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप फ्रॉड
- OTP और बैंकिंग जानकारी चोरी
ऐसे करें खुद का बचाव
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि थोड़ी सावधानी से बड़ी ठगी से बचा जा सकता है।
बचाव के प्रमुख तरीके:
- किसी अनजान नंबर से आई APK फाइल कभी डाउनलोड न करें।
- किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें।
- ओटीपी, बैंक डिटेल और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- मोबाइल और कंप्यूटर को हमेशा अपडेट रखें।
- मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें।
- सार्वजनिक WiFi पर ऑनलाइन पेमेंट करने से बचें।
- डिजिटल अरेस्ट जैसी कॉल आने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
- केवल भरोसेमंद ऐप और वेबसाइट का उपयोग करें।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप अनजान व्यक्ति के कहने पर इंस्टॉल न करें।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके खोज रहे हैं। ऐसे में लोगों को हर संदिग्ध कॉल, लिंक और मैसेज को लेकर सतर्क रहना होगा।
मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराध यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत बनने वाली है।