NSE IPO को बोर्ड की मंजूरी, 10 साल बाद लिस्टिंग की राह साफ

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बोर्ड ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित IPO को हरी झंडी दे दी है। बोर्ड की मंजूरी के साथ ही NSE के पब्लिक लिस्टेड कंपनी बनने की राह साफ हो गई है। यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी इसमें कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचेंगे। हाल ही में SEBI से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद यह अहम फैसला लिया गया है, जिसे भारत के कैपिटल मार्केट के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

NSE ने साफ किया है कि IPO के जरिए कंपनी में नई पूंजी नहीं आएगी। लिस्टिंग NSE और BSE दोनों स्टॉक एक्सचेंजों पर हो सकती है, हालांकि यह रेगुलेटरी अप्रूवल, मार्केट की स्थिति और अन्य कारकों पर निर्भर करेगी। NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जहां इक्विटी और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सबसे ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम देखने को मिलता है।

IPO प्रक्रिया के लिए बनाई गई कमेटी
बोर्ड ने IPO की पूरी प्रक्रिया को संभालने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता टेबलेश पांडे करेंगे। इसमें पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स श्रीनिवास इंजेती, प्रोफेसर ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और प्रोफेसर सिवकुमार को शामिल किया गया है। इसके अलावा NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अशिश चौहान भी इस कमेटी का हिस्सा होंगे।

यह कमेटी लिस्टिंग से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले लेगी, मर्चेंट बैंकर और लीगल एडवाइजर की नियुक्ति के मानदंड तय करेगी और ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने में मदद करेगी। बोर्ड की ओर से दिए गए सभी दायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी इसी कमेटी पर होगी।

10 साल बाद पूरा होगा IPO का इंतजार
NSE का IPO करीब एक दशक से अटका हुआ था। कंपनी ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP दाखिल किया था, लेकिन रेगुलेटरी और लीगल अड़चनों के चलते उसे वापस लेना पड़ा था। इसके बाद को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों की जांच के कारण IPO प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अब SEBI से NOC मिलने के बाद यह लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है और NSE एक नए दौर में प्रवेश करेगा।

ग्रे मार्केट में 5 लाख करोड़ से ज्यादा वैल्यूएशन
एनालिस्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट में NSE की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। कंपनी के करीब 1.77 लाख शेयरहोल्डर्स हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, OFS के तहत लगभग 4 से 4.5 प्रतिशत शेयर बेचे जा सकते हैं, जिसकी कुल वैल्यू करीब 23,000 करोड़ रुपए हो सकती है। LIC, SBI और टेमासेक जैसे बड़े शेयरहोल्डर्स इस IPO में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

मार्च–अप्रैल तक DRHP फाइल होने की संभावना
IPO कमेटी के गठन के बाद अब प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि मार्च–अप्रैल तक DRHP फाइल किया जा सकता है। पूरी लिस्टिंग प्रक्रिया में 8 से 9 महीने का समय लग सकता है। IPO के बाद NSE की ट्रांसपेरेंसी और कॉरपोरेट गवर्नेंस में और सुधार आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम के लिए एक लैंडमार्क इवेंट साबित होगा।

सेटलमेंट के बाद मिली राह आसान
NSE ने जून 2025 में सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल की थी और करीब 1,400 करोड़ रुपए का सेटलमेंट अमाउंट देने पर सहमति जताई थी। नवंबर 2025 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में कंपनी ने 1,297 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया था, जबकि 100 करोड़ रुपए पहले से जमा थे। सेबी के कई विभागों से इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिलने के बाद मामला अब हाई पावर्ड एडवाइजरी कमिटी और फिर सेबी के व्होल टाइम मेंबर्स के पास जाएगा।

लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेटलमेंट के बाद सुप्रीम कोर्ट से केस वापस लिए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। IPO के जरिए NSE की लिस्टिंग से बाजार में नई लिक्विडिटी आएगी और छोटे-बड़े निवेशकों को देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी लेने का मौका मिलेगा। हालांकि

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