इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में दर्ज गैंगरेप और अपहरण के मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जिस मामले को शुरुआत में सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण जैसी गंभीर वारदात माना जा रहा था, वह बाद में झूठी कहानी निकली। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग छात्रा ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल जाने और देर रात घर लौटने के डर से गैंगरेप की कहानी गढ़ी थी।
मामले ने शहरभर में सनसनी फैला दी थी। छात्रा ने पुलिस को बताया था कि कोचिंग से लौटते समय सिल्वर रंग की कार में सवार तीन युवकों ने उसका अपहरण कर लिया और सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई।
जानकारी के मुताबिक, 16 वर्षीय छात्रा मूसाखेड़ी इलाके की रहने वाली है और बंगाली कॉलोनी में कोचिंग पढ़ने जाती है। बुधवार देर रात उसके परिजन उसे लेकर शिप्रा थाने पहुंचे थे। छात्रा ने पुलिस को रोते हुए बताया कि रास्ते में तीन युवकों ने जबरन उसे कार में बैठा लिया। उसने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी और उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। जांच के दौरान पुलिस को छात्रा की कहानी पर संदेह हुआ। फुटेज में छात्रा किसी संदिग्ध कार में नहीं बल्कि अंश नाम के युवक के साथ जाती दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने महिला अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रा से दोबारा पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान छात्रा टूट गई और उसने पूरी सच्चाई कबूल कर ली। छात्रा ने बताया कि वह अपने बॉयफ्रेंड अंश के साथ कोचिंग से सीधे विजयनगर इलाके के एक होटल गई थी। दोनों वहां कई घंटों तक रुके। देर रात होने के बाद छात्रा को घर लौटने में डर लगने लगा।
छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसकी सौतेली मां काफी सख्त स्वभाव की है और देर से घर पहुंचने पर विवाद होने की आशंका थी। इसी डर और तनाव के कारण उसने अपहरण और गैंगरेप की झूठी कहानी बना दी।
एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर मामले की सच्चाई सामने आई। गुरुवार को कोर्ट में छात्रा के बयान दर्ज कराए गए, जहां उसने स्वीकार किया कि उसके साथ गैंगरेप जैसी कोई घटना नहीं हुई थी।

हालांकि मामला झूठा निकला, लेकिन छात्रा के नाबालिग होने के कारण पुलिस ने उसके प्रेमी अंश को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून के तहत कार्रवाई करना अनिवार्य होता है।
इस घटना ने समाज और परिवार व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों पर पारिवारिक दबाव, डर और संवाद की कमी ऐसी परिस्थितियों को जन्म देती है, जहां बच्चे गलत फैसले ले बैठते हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झूठी शिकायतें वास्तविक अपराधों की जांच को प्रभावित करती हैं और इससे निर्दोष लोगों पर भी गंभीर आरोप लग सकते हैं।