इंदौर में बना ‘नागपाश’ ड्रोन जैमर: हवा में उड़कर दुश्मन के ड्रोन करेगा निष्क्रिय, स्वॉर्म अटैक भी होगा बेअसर !

Spread the love

मध्य प्रदेश के इंदौर में विकसित किया गया हाईटेक एंटी-ड्रोन सिस्टम ‘नागपाश’ अब भारतीय रक्षा तकनीक की नई ताकत बनकर उभर रहा है। तीन स्टार्टअप्स के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया यह सिस्टम देश का पहला ‘एयर टू एयर जैमिंग सिस्टम’ बताया जा रहा है, जो हवा में उड़ते हुए दुश्मन के ड्रोन तक पहुंचकर उसे निष्क्रिय कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप विकसित एक महत्वपूर्ण स्वदेशी तकनीक मान रहे हैं।

नागपाश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन पर स्थिर रहकर काम नहीं करता, बल्कि खुद उड़ान भरकर दुश्मन के ड्रोन के पास पहुंचता है और उसके नेविगेशन तथा कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर देता है। इससे दुश्मन का ड्रोन नियंत्रण खो देता है और हवा में ही दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है।

‘स्वॉर्म अटैक’ को भी कर सकता है निष्क्रिय

कंपनी का दावा है कि नागपाश एक साथ कई ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। आधुनिक युद्ध में अब ‘स्वॉर्म अटैक’ यानी बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन के जरिए हमला करना तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे हमलों में कई ड्रोन एक साथ किसी सैन्य ठिकाने या संवेदनशील क्षेत्र पर हमला करते हैं। नागपाश को इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।

तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम अपनी निर्धारित रेंज में आने वाले ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को भ्रमित कर देता है। परिणामस्वरूप ड्रोन रास्ता भटक जाते हैं या सीधे जमीन पर गिर जाते हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की सराहना

हाल ही में प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक 2026 कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को नागपाश का प्रेजेंटेशन दिखाया गया। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार रक्षा मंत्री ने इसे भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी तकनीक बताया।

कंपनी के CEO और CTO अभिषेक मिश्रा ने बताया कि आधुनिक युद्ध में अब केवल हमले का जवाब देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ यानी दुश्मन की क्षमता को पहले ही खत्म करना जरूरी हो गया है। नागपाश इसी रणनीति पर आधारित तकनीक है।

छह महीने पहले मिला डिफेंस अप्रूवल

कंपनी की CPO रोशनी शुक्ला के अनुसार अप्रैल 2026 में नागपाश को रक्षा उपयोग के लिए ‘नॉर्थ टेक’ के फोकस ग्रुप-6 की असेसिंग टीम से मंजूरी मिली थी। यह सिस्टम विशेष रूप से रक्षा सेवाओं और सुरक्षा एजेंसियों के लिए विकसित किया गया है।

कंपनी लंबे समय से विभिन्न डिफेंस एजेंसियों, रिसर्च सेंटरों और ट्रेनिंग संस्थानों के साथ काम कर रही है। इसी वजह से तकनीक को परीक्षण और अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी से सफलता मिली।

कई राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में ट्रायल

फिलहाल नागपाश के ट्रायल मध्य प्रदेश के सागर, ग्वालियर, भोपाल और महू सहित कई स्थानों पर किए जा रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और लेह जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसका परीक्षण चल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रायल पूरी तरह सफल रहते हैं तो आने वाले समय में इसे बड़े स्तर पर भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए तैनात किया जा सकता है।

छोटे आकार के कारण पकड़ना मुश्किल

ड्रोन युद्ध की सबसे बड़ी चुनौती छोटे आकार वाले ड्रोन हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया ने देखा कि छोटे ड्रोन भी बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। ऐसे ड्रोन रडार पर कई बार पक्षियों की तरह दिखाई देते हैं, इसलिए उन्हें पहचानना मुश्किल होता है।

नागपाश इसी चुनौती का समाधान देने की कोशिश करता है। यह सीधे दुश्मन के ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक और नेविगेशन सिस्टम पर हमला करता है। इससे बिना मिसाइल या गोलीबारी के ड्रोन को निष्क्रिय किया जा सकता है।

सेना को दिए 700 से ज्यादा ड्रोन

कंपनी का दावा है कि वह अब तक भारतीय सेना को 700 से अधिक ड्रोन उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा करीब 2 हजार सैनिकों और अधिकारियों को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग भी दी गई है।

देशभर में 25 से अधिक एडवांस ड्रोन लैब स्थापित की जा चुकी हैं, जहां ड्रोन तकनीक, सुरक्षा और ऑपरेशन पर काम किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य भारत को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

रक्षा तकनीक में नया अध्याय

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंदौर में विकसित नागपाश भारत की रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। अब तक एंटी-ड्रोन तकनीक मुख्य रूप से जमीन आधारित थी, लेकिन हवा में उड़कर दुश्मन के ड्रोन को खत्म करने वाला यह सिस्टम भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए नई उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है और ड्रोन आधारित हमले बढ़ सकते हैं। ऐसे में नागपाश जैसी स्वदेशी तकनीक भारत की सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *