इंदौर में साइबर ठगी: बैंक अफसर बनकर महिला से उड़ाए 84 हजार रुपए, RTO चालान के नाम पर किया फ्रॉड !

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मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले ठग ने आरटीओ चालान का डर दिखाकर 84 हजार रुपए से ज्यादा की रकम खाते से निकाल ली। आरोपी ने खुद को बैंक का अधिकारी बताते हुए महिला को झांसे में लिया और कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते को खाली कर दिया। मामले में साइबर सेल की जांच के बाद एमआईजी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार पीड़िता 48 वर्षीय रश्मि अग्रवाल हैं, जिन्होंने इस संबंध में साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद सोमवार को एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात मोबाइल कॉलर के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

“आपकी कार का आरटीओ चालान आया है” कहकर लगाया झांसा

पुलिस के मुताबिक घटना 21 मई 2025 की है। रश्मि अग्रवाल के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बीओआई (बैंक ऑफ इंडिया) का अधिकारी बताया।

आरोपी ने महिला से कहा कि उनकी कार का आरटीओ चालान आया है और उसका भुगतान डेबिट कार्ड के माध्यम से करना होगा। उसने बेहद भरोसेमंद अंदाज में बातचीत की, जिससे महिला को शुरुआत में किसी प्रकार का शक नहीं हुआ।

जब आरोपी ने डेबिट कार्ड नंबर मांगा तो महिला ने बताया कि वह कई वर्षों से डेबिट कार्ड का उपयोग नहीं कर रही हैं और उन्हें कार्ड नंबर भी याद नहीं है। इसके बाद आरोपी ने कहा कि वह बैंक रिकॉर्ड से कार्ड की जानकारी चेक कर लेगा और महिला से मोबाइल दो मिनट तक होल्ड पर रखने को कहा।

कुछ देर बाद कॉल अचानक कट गया। उस समय तक महिला को यह एहसास नहीं हुआ था कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

रात में खाते से गायब मिले पैसे

रश्मि अग्रवाल ने जब रात में अपने खाते का बैलेंस चेक किया तो उनके होश उड़ गए। खाते से 84 हजार रुपए से अधिक की राशि निकल चुकी थी। अगले दिन वह तुरंत बैंक पहुंचीं और पासबुक एंट्री कराई।

पासबुक अपडेट होने पर पता चला कि उनके खाते में मात्र 49 रुपए शेष बचे हैं। खाते की डिटेल निकलवाने पर जानकारी मिली कि चार से अधिक ट्रांजैक्शन के जरिए अलग-अलग ऐप और डिजिटल माध्यमों से रकम निकाली गई है।

पीड़िता ने बताया कि घटना के कुछ समय बाद उनके अकाउंट से जुड़ा व्हाट्सऐप भी डिलीट हो गया, जिससे उन्हें संदेह हुआ कि साइबर ठगों ने उनके मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक किसी तरह पहुंच बना ली थी।

साइबर सेल पहुंची पीड़िता

घटना के तुरंत बाद रश्मि अग्रवाल ने राज्य साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। साइबर विशेषज्ञों ने मामले की प्राथमिक जांच की, जिसके बाद एमआईजी थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस अब मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट ऐप्स और तकनीकी डिटेल्स के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है। साइबर सेल यह भी जांच कर रही है कि आरोपी किसी संगठित साइबर गैंग का हिस्सा तो नहीं है।

बढ़ रहे हैं आरटीओ और बैंकिंग फ्रॉड

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में आरटीओ चालान, केवाईसी अपडेट, बैंक अकाउंट बंद होने और क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने जैसे बहानों से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ठग खुद को बैंक अधिकारी या सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर अपराधी अब लोगों को डर या जल्दबाजी में डालकर उनसे ओटीपी, कार्ड डिटेल, यूपीआई जानकारी या मोबाइल एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं।

पुलिस की अपील

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें। बैंक या सरकारी विभाग कभी भी फोन पर डेबिट कार्ड नंबर, ओटीपी या सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते।

यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत कॉल काट दें और संबंधित बैंक या साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें। किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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