अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना ने सीजफायर के बीच ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी तेल टैंकरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बमबारी की। इसके बाद तेहरान ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देने की चेतावनी दी है।
ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क के पास ईरानी समुद्री इलाके से होर्मुज स्ट्रेट की ओर जा रहे तेल टैंकर पर हमला किया। ईरान ने इसे संघर्षविराम की भावना के खिलाफ करार दिया है।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिकी जंगी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए थे, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी छोटी नौकाओं और सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति कभी नहीं देगा।

होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 1500 जहाज
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि होर्मुज संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। तेल सप्लाई और वैश्विक व्यापार पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
तेल कीमतों में भारी उछाल
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। युद्ध शुरू होने के बाद से तेल कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।
इसका असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान के बीच 30 दिन के समझौते पर चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 30 दिन तक संघर्ष रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को व्यावसायिक जहाजों के लिए खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। इस दौरान स्थायी परमाणु समझौते पर भी चर्चा जारी रह सकती है।
हालांकि सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को सौंप दे और कई परमाणु सुविधाएं बंद करे, जबकि ईरान कुछ शर्तों के साथ सीमित समझौते के पक्ष में है।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भी प्रभावित
तनाव का असर एशियाई देशों पर भी पड़ रहा है। चीन ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट में एक चीनी तेल टैंकर पर हमला हुआ। वहीं जापानी शिपिंग कंपनी ने कहा कि उसके जहाज बिना कोई शुल्क दिए इस मार्ग से निकले हैं।
दक्षिण कोरिया पहुंचा एक तेल टैंकर इस संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।
इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज
इस बीच मध्य पूर्व में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष भी तेज हो गया है। इजराइल ने दावा किया है कि उसने हिजबुल्लाह के कई बड़े कमांडरों को मार गिराया है। जवाब में हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली ठिकानों पर हमले किए हैं।
भारतीय नाविकों की बढ़ी चिंता
होर्मुज क्षेत्र में फंसे भारतीय नाविकों ने खराब हालात की जानकारी दी है। कुछ नाविकों ने बताया कि वे कई हफ्तों से जहाजों पर फंसे हुए हैं और सीमित भोजन-पानी के सहारे गुजारा कर रहे हैं। भारतीय नाविकों ने युद्ध, मिसाइल हमलों और लगातार तनाव के बीच मानसिक परेशानी की बात भी कही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो दुनिया भर में तेल संकट और महंगाई बढ़ सकती है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।