एक करोड़ रुपए हड़पने के आरोप पर गरमाई राजनीति: कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानक पटेल ने बताया षड्यंत्र !

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दमोह।
दमोह लोकसभा क्षेत्र की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब पूर्व भाजपा सांसद डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया के प्रतिनिधि रहे राजकुमार दुबे ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानक पटेल पर एक करोड़ रुपए हड़पने का आरोप लगाया। आरोपों के सामने आने के बाद सोमवार को मानक पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी आरोपों को निराधार, राजनीतिक प्रेरित और छवि खराब करने की साजिश बताया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी प्रशासन से की है।

भोपाल एम्स से जारी हुआ वीडियो

इस विवाद ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब भोपाल एम्स में उपचाराधीन राजकुमार दुबे और उनकी पत्नी साधना दुबे का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में साधना दुबे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मानक पटेल ने उनके पति से व्यापारिक और राजनीतिक जानकारियों के बदले करोड़ों रुपए लिए थे।

उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि यदि उनके पति के स्वास्थ्य को किसी प्रकार की हानि पहुंचती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर मानक पटेल जिम्मेदार होंगे। वीडियो सामने आने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई और मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मानक पटेल ने दिए जवाब

आरोपों के बाद सोमवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानक पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता की ओर से जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, वे फर्जी हैं और तथ्यों से मेल नहीं खाते।

मानक पटेल ने कहा कि कथित अनुबंध पत्र डीके बिल्डर के लेटरहेड पर वर्ष 2025 में तैयार किया गया है, जबकि उसमें लेनदेन का हिसाब वर्ष 2014 से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक रूप से उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से इस प्रकार की साजिश रच रहे हैं। उनका कहना था कि यदि वास्तव में कोई आर्थिक लेनदेन हुआ होता, तो शिकायतकर्ता इतने वर्षों तक चुप नहीं रहते।

जेसीबी मशीन के विवाद पर भी उठाए सवाल

विवाद में जेसीबी मशीन के किराए का मुद्दा भी सामने आया है। इस पर मानक पटेल ने पुलिस रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी प्रस्तुत करते हुए कहा कि संबंधित जेसीबी मशीन वर्ष 2016 में उनके पास आई थी, जबकि शिकायतकर्ता वर्ष 2014 से किराए की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में 10 वर्षों से राशि बकाया थी, तो शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की। पटेल ने कहा कि यह पूरा मामला तथ्यों से परे और राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है।

एसपी को दिया निष्पक्ष जांच का आवेदन

मानक पटेल ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि यह जांच की जाए कि राजकुमार दुबे के पास कथित एक करोड़ रुपए की राशि कहां से आई और उसका स्रोत क्या था।

उन्होंने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और सच्चाई सामने आने के बाद सभी आरोप स्वतः निराधार साबित हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

“केवल परिचय था, कोई व्यावसायिक संबंध नहीं”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मानक पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि राजकुमार दुबे से उनकी पहचान केवल पड़ोसी और पूर्व सांसद प्रतिनिधि के रूप में थी। उन्होंने कहा कि उनके बीच किसी प्रकार का व्यावसायिक लेनदेन नहीं हुआ।

पटेल ने कहा कि राजनीति में सक्रिय रहने के कारण वे कई लोगों को जानते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति के साथ उनका आर्थिक संबंध हो। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

पूरा मामला सामने आने के बाद दमोह जिले की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कार्यकर्ता इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं आम लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि मामले की जांच आगे बढ़ती है तो इसमें और नए खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले में औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और वास्तविक स्थिति क्या है।

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