‘एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को नई मजबूती, 56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक मंच पर—सागर में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया सुशासन का नया मॉडल !

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मध्यप्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को एक नई दिशा और गति देने के उद्देश्य से विकसित ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ ने प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक सेवा वितरण प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सागर जिले की कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सुशासन की आधारशिला बन चुका है और इसके माध्यम से नागरिकों को अब सरकारी सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों और पोर्टलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

उन्होंने बताया कि इस एकीकृत नागरिक सेवा मंच के माध्यम से 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाएँ एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल नागरिकों के समय और संसाधनों की बचत कर रही है, बल्कि सेवा वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी भी बना रही है। कलेक्टर ने कहा कि वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह पोर्टल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों, विभागों और सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़कर शासन व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाना है। इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी प्रक्रियाओं में तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाकर कार्यप्रणाली को सरल और तेज़ बनाया है।

एकीकृत सेवा प्रणाली से प्रक्रिया हुई सरल

एमपी ई-सेवा पोर्टल पर नागरिकों को अब विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग पोर्टलों पर जाने या बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं है। नागरिक eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, आवेदन की स्थिति ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सेवाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं।

इस प्रणाली में आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएँ शामिल की गई हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस हो गई है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएँ भी कम हुई हैं। डिजिटल प्रक्रिया ने सेवा वितरण को अधिक समयबद्ध और व्यवस्थित बनाया है।

समग्र पोर्टल से एकीकरण और ऑटो-वेरिफिकेशन सुविधा

एमपी ई-सेवा को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से भी जोड़ा गया है। इसके तहत प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और प्रत्येक सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी प्रदान की गई है। इस एकीकरण के माध्यम से ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा विकसित की गई है, जिससे पात्रता निर्धारण स्वतः ही हो जाता है।

इस प्रणाली से दोहराव और अनावश्यक देरी समाप्त हो गई है। पोर्टल की एक महत्वपूर्ण विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिसके अंतर्गत एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज भविष्य की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं। इससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज अपलोड करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और प्रक्रिया और अधिक सरल हो जाती है।

मोबाइल-फर्स्ट और नागरिक केंद्रित डिज़ाइन

एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण के आधार पर विकसित किया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। इसमें बहुभाषीय सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को भाषा संबंधी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता।

इसके अलावा, दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष डिज़ाइन तैयार किया गया है, जिससे यह प्लेटफॉर्म सभी वर्गों के लिए सुलभ और उपयोगी बन सके। अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक उपयोगिता को दर्शाते हैं।

इनमें 3 हजार 446 आवेदन, 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैकिंग और डाउनलोड गतिविधियाँ तथा 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें शामिल हैं। यह आँकड़े बताते हैं कि नागरिक इस डिजिटल सेवा प्रणाली को तेजी से अपना रहे हैं।

डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश की मजबूत स्थिति

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। राज्य ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

इसके साथ ही प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ परियोजना के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। ये उपलब्धियाँ मध्यप्रदेश के डिजिटल प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी नवाचारों की पुष्टि करती हैं।

निष्कर्ष

एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप ने मध्यप्रदेश में शासन और प्रशासन के तरीके को पूरी तरह डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बना दिया है। यह पहल न केवल सरकारी सेवाओं को तेज और पारदर्शी बना रही है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन को भी बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रणाली इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश में डिजिटल गवर्नेंस का एक मॉडल राज्य बन सकता है।

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