कलेक्टर प्रतिभा पाल का सख्त संदेश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं, 45 दिन से ज्यादा लंबित नहीं रहेंगे नामांतरण और सीमांकन के मामले !

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सागर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कलेक्टर Pratibha Pal ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने विकास कार्यों, उपार्जन व्यवस्था, डिजिटलाइजेशन और जन शिकायतों के निराकरण की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता और आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में मानसून की तैयारियों को लेकर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने जिले के सभी नगरीय निकायों को “ड्राइव मोड” में काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस सप्ताह विशेष अभियान चलाकर नालियों और नालों पर किए गए अतिक्रमण हटाए जाएं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले संबंधित क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को सूचित किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर जेसीबी मशीनों का उपयोग कर नालों की पूरी सफाई सुनिश्चित की जाए।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति न बने, इसके लिए अभी से तैयारी करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। शहर और कस्बों में जल निकासी की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। उपार्जन केंद्रों पर चना और मसूर के परिवहन में आ रही समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने डीडीए अधिकारियों को स्वयं उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करने को कहा ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जितना अनाज परिवहन हो चुका है, उसका उसी दिन अनिवार्य रूप से एसी नोट जारी किया जाए।

किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने डीआरसीएस अधिकारियों को समितियों का दौरा कर किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यों में तेजी लाने के लिए रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण किसी भी स्थिति में 45 दिन से अधिक लंबित नहीं रहने चाहिए। सभी एसडीएम को अपने क्षेत्रों में पुराने और विरासत रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया।

उन्होंने सभी विभागों को ई-ऑफिस प्रणाली अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि अब प्रशासनिक कार्यों को तकनीक के अनुरूप ढालना जरूरी है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और काम की गति में सुधार होगा।

बैठक के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को लेकर कलेक्टर का रवैया बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण होना चाहिए। केवल औपचारिक जवाब देकर मामलों को बंद करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने सीएमएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और विभाग को “ए ग्रेड” में लाने के लिए गंभीरता से काम करें। उन्होंने कहा कि महीनों से लंबित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर ने यहां तक कह दिया कि शिकायतों के समाधान के बाद ही संबंधित अधिकारियों का वेतन आहरित होगा।

बैठक में 50 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों की विभागवार समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने सबसे पुराने मामलों को स्वयं देखा और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। उन्होंने कहा कि निजी भूमि पर अवैध कब्जा, रास्ता अतिक्रमण, भू-अर्जन और सीमांकन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।

उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का निराकरण केवल कागजों में नहीं बल्कि आवेदकों की संतुष्टि के साथ किया जाए। समय-सीमा के पत्रों का जवाब न देने वाले विभागों को तत्काल प्रतिवेदन भेजने और लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश भी दिए गए।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बैठक के अंत में कहा कि आगामी समय-सीमा बैठक तक सभी अधिकारी निर्धारित लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करें। यदि किसी विभाग में लापरवाही या कार्य में देरी पाई गई तो संबंधित विभागाध्यक्ष के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी Vivek KV, अपर कलेक्टर Avinash Rawat, सिटी मजिस्ट्रेट Gagan Bisen सहित सभी एसडीएम और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रशासन की इस सख्ती को जिले में जवाबदेही बढ़ाने और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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