सागर शहर की ऐतिहासिक पहचान मानी जाने वाली Lakha Banjara Lake एक बार फिर जनसहभागिता और स्वच्छता अभियान का केंद्र बनी। गंगा दशहरा पर्व के अवसर पर चलाए जा रहे जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत सोमवार सुबह शहर के प्रमुख घाटों और जलस्रोतों पर विशेष सफाई अभियान आयोजित किया गया। सुबह 7 बजे से शुरू हुए इस अभियान में महापौर Sangeeta Tiwari, निगमायुक्त Rajkumar Khatri तथा जिला पंचायत सीईओ Vivek KV सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक शामिल हुए।
इस दौरान लाखा बंजारा झील के चकराघाट सहित विभिन्न घाटों की साफ-सफाई की गई। सभी ने मिलकर झाड़ू लगाई, घाटों पर फैला कचरा एकत्र किया और उसे हटाया गया। झील के किनारों के साथ-साथ पानी की सतह पर तैर रहे कचरे को भी साफ किया गया। घाटों को प्रेशर मशीनों की मदद से धोकर चमकाया गया।

अभियान में स्थानीय पार्षद वैदेही पुरोहित, जिला प्रशासन के अधिकारी गगन विसेन, अमन मिश्रा, नगर निगम उपायुक्त एस.एस. बघेल, इंजीनियर संजय तिवारी, स्वच्छता अधिकारी राजेश सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूरे अभियान के दौरान लोगों में उत्साह दिखाई दिया और सभी ने जल संरक्षण तथा स्वच्छता का संदेश दिया।
महापौर संगीता तिवारी ने कहा कि लाखा बंजारा झील केवल एक जलस्रोत नहीं बल्कि सागर शहर की पहचान है। उन्होंने कहा कि इस झील का उल्लेख देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अपने संबोधनों में कर चुके हैं। आज यह झील अपने अद्भुत सौंदर्य के कारण दूर-दूर से आने वाले लोगों को आकर्षित कर रही है।
महापौर ने कहा कि सागर को प्रदेश और देश में पहचान दिलाने वाले इस विशाल जलस्रोत को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने आसपास के जलस्रोतों की सफाई और संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। जलगंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बन चुका है।
उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा पर्व जल के महत्व को समझने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। यह पर्व हमें जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून तक लगातार चलेगा। इस दौरान शहर के विभिन्न जलस्रोतों की सफाई, संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है।

महापौर ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि हर वार्ड और मोहल्ले के लोग अपने आसपास मौजूद तालाबों, कुओं और अन्य जलस्रोतों की सफाई की जिम्मेदारी लें। यदि नागरिक स्वयं आगे आकर इस कार्य में भागीदारी करेंगे तो जल संरक्षण को लेकर समाज में नई जागरूकता पैदा होगी।
वहीं निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों और जलस्रोतों को केवल पानी का स्रोत नहीं बल्कि जीवनदायिनी माना गया है। गंगा दशहरा का पर्व इसी परंपरा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले लाखा बंजारा झील का पानी पेयजल के रूप में उपयोग किया जाता था। लंबे समय तक प्रदूषण झेलने के बाद अब इस झील का कायाकल्प हुआ है और यह फिर से अपने स्वच्छ स्वरूप में दिखाई देने लगी है।
उन्होंने बताया कि झील में अब स्वच्छ वर्षाजल एकत्र हो रहा है, जिससे आसपास के छोटे जलस्रोत भी रिचार्ज हो रहे हैं। इससे भूजल स्तर में भी सुधार हुआ है। झील के सौंदर्यीकरण और संरक्षण से पर्यावरणीय सुधार के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। अब यह झील फिर से सागर शहर की शान बनती जा रही है।

निगमायुक्त ने नागरिकों से अपील की कि झील के आसपास लगाए गए डस्टबिन, लाइट, बेंच, सजावटी सामग्री और अन्य उपकरणों को सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि यह सभी सुविधाएं नागरिकों के उपयोग के लिए हैं और इनकी सुरक्षा भी जनता की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम लगातार शहर की सुविधाओं और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहा है, लेकिन इसमें नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी है। जिस तरह आज स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ सफाई अभियान में भाग लिया, उसी तरह भविष्य में भी झील की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए आगे आते रहना चाहिए।
इस अभियान के दौरान लोगों ने “जल है तो कल है” और “स्वच्छ जलस्रोत, सुरक्षित भविष्य” जैसे संदेशों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का प्रयास भी किया। बच्चों और युवाओं ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा जलगंगा संवर्धन अभियान प्रदेशभर में जल संरक्षण और जलस्रोतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। सागर में यह अभियान अब एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है, जिसमें प्रशासन के साथ आम नागरिक भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।