प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा लगातार सख्त एवं व्यापक कार्रवाई की जा रही है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में अब तक 2938 स्थानों पर जांच की जा चुकी है, जिसमें बड़ी मात्रा में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान 4547 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं, जो अवैध भंडारण और कालाबाजारी की ओर संकेत करते हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस विषय में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
मंत्री ने बताया कि केवल एलपीजी ही नहीं, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण तंत्र पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के 765 रिटेल आउटलेट्स यानी पेट्रोल पंपों की जांच कराई गई है, जिनमें अनियमितता पाए जाने पर 2 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। जिला आपूर्ति नियंत्रकों, संबंधित अधिकारियों एवं ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को लगातार निर्देश दिए गए हैं कि वे पेट्रोल पंपों की नियमित जांच सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत रोकें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का भंडारण एवं आपूर्ति उपलब्ध है। सभी रिफाइनरियां अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं ताकि सप्लाई चेन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। देश और प्रदेश दोनों स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सामान्य और संतोषजनक स्थिति में बनी हुई है।

उपभोक्ताओं की सुविधा और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मंत्री श्री राजपूत ने नागरिकों से अपील की है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, वहां के उपभोक्ता शीघ्र पीएनजी कनेक्शन लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें सतत, सुरक्षित एवं सुविधाजनक गैस आपूर्ति प्राप्त होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएनजी पूरी तरह सुरक्षित है और इसके उपयोग को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए।
प्रदेश सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। उपभोक्ताओं को इंडक्शन कुकिंग, सोलर कुकर, बायोगैस, गोबरधन योजना तथा स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ जैसे विकल्पों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह प्रयास न केवल ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि 44 पंजीकृत कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्ट्स को शीघ्र क्रियाशील किया जाए। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में संचालित 136 बायोगैस प्लांट्स को भी सक्रिय करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
रसोई गैस की स्थिति को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही बुकिंग के अनुसार समय पर सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वहीं कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम एवं आवंटन प्रतिशत के आधार पर नियमित सप्लाई दी जा रही है। वर्तमान में किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधा नहीं है और व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित हो रही है।
पीएनजी गैस प्रणाली के विस्तार के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी के निर्देशानुसार जिन घरों में पाइपलाइन अधोसंरचना उपलब्ध है लेकिन वे अभी तक पीएनजी से नहीं जुड़े हैं, उन्हें आगामी तीन महीनों में जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सीजीडी संस्थाओं, जिला प्रशासन, नगर निगम/नगर पालिका, खाद्य विभाग एवं ऑयल कंपनियों के सहयोग से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में पहले से पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी समानांतर रूप से जारी रखा जाए। सभी संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन के 24 घंटे के भीतर आवश्यक स्वीकृतियां जारी की जाएं ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
इसके अतिरिक्त गृह विभाग, पुलिस, सीएपीएफ, रक्षा प्रतिष्ठान, सरकारी कॉलोनियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में भी पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक संस्थानों एवं घरों को स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से जोड़ा जाए और एलपीजी पर निर्भरता को क्रमिक रूप से कम किया जाए।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध सुविधा मिल सके और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।