ऑटो में छूटा बैग, 3 दिन बाद सुरक्षित मिला—सागर पुलिस की सराहनीय कार्रवाई !

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सागर पुलिस ने एक बार फिर अपनी तत्परता, संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए एक युवती का गुम हुआ बैग महज तीन दिनों में ढूंढकर सुरक्षित वापस दिलाया। इस बैग में ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज थे, जो युवती के करियर और भविष्य से सीधे जुड़े हुए थे। बैग की गुमशुदगी से परेशान युवती और उसके परिवार के लिए यह घटना किसी बड़ी राहत से कम नहीं रही।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राची रजक, निवासी गायत्री नगर मकरोनिया, निजी क्षेत्र की कंपनी टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस में कार्यरत हैं। 27 अप्रैल 2026 को वह रोजाना की तरह अपने घर से ऑफिस जाने के लिए निकली थीं। मकरोनिया से ऑटो में बैठकर राधा तिराहा पहुंचीं, लेकिन जल्दबाजी में उतरते समय उनका बैग ऑटो में ही छूट गया। उस समय उन्हें इसका ध्यान नहीं रहा, लेकिन कुछ देर बाद जब उन्हें बैग की याद आई तो उनके होश उड़ गए।

बैग में ऑफिस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, कागजात और अन्य जरूरी सामग्री रखी हुई थी, जो उनके करियर के लिए बेहद अहम थी। बैग खोने की जानकारी मिलते ही प्राची रजक घबराई हुई अवस्था में सागर पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं और पूरी घटना की जानकारी दी। उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मामले की गंभीरता को तुरंत समझा और बिना देर किए कार्रवाई शुरू कर दी।

कंट्रोल रूम में पदस्थ उप निरीक्षक आरकेएस चौहान ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा को इस घटना की सूचना दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने तुरंत बैग की तलाश के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।

इसके बाद सागर पुलिस कंट्रोल रूम (सीसीटीवी) टीम और ट्रैफिक पुलिस को सक्रिय किया गया। महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक सहित टीम के अन्य सदस्यों को आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। घंटों तक लगातार फुटेज देखने के बाद पुलिस ने राधा तिराहा पर प्राची रजक को ऑटो से उतरते हुए चिन्हित कर लिया। इससे संबंधित ऑटो की पहचान तो हो गई, लेकिन वाहन का नंबर स्पष्ट नहीं हो पाया, जिससे चुनौती और बढ़ गई।

इसके बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी और तकनीकी व मानवीय दोनों स्तरों पर प्रयास जारी रखे। पुलिस ने ऑटो की फोटो और उपलब्ध जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित किया। साथ ही, शहर के ऑटो चालकों के बीच भी यह जानकारी साझा की गई और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।

लगातार तीन दिनों तक पुलिस टीम ने समन्वय और धैर्य के साथ काम किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और संबंधित ऑटो चालक की पहचान कर ली गई। उसे तत्काल कंट्रोल रूम बुलाया गया, जहां उसके पास से प्राची रजक का बैग सुरक्षित बरामद कर लिया गया। बैग में रखे सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पूरी तरह सुरक्षित पाए गए।

अपना बैग वापस मिलने पर प्राची रजक भावुक हो उठीं। उन्होंने सागर पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “पिछले तीन दिनों से मैं और मेरा परिवार बहुत परेशान थे। हमें लग रहा था कि अब यह बैग कभी नहीं मिलेगा। लेकिन सागर पुलिस ने मेरी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण चीज मुझे वापस दिला दी, जिसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।”

इस पूरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में सागर पुलिस कंट्रोल रूम (सीसीटीवी) टीम, ट्रैफिक पुलिस और अन्य स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सतत मेहनत, तकनीकी विश्लेषण और संवेदनशीलता के चलते यह संभव हो सका।

सागर पुलिस ने इस घटना के माध्यम से आमजन को यह संदेश भी दिया है कि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस पूरी तरह से तत्पर और जिम्मेदार है। आधुनिक तकनीक के उपयोग और मानवीय दृष्टिकोण के साथ पुलिस नागरिकों की सहायता के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। यह घटना न केवल पुलिस की कार्यक्षमता को दर्शाती है, बल्कि आम लोगों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को भी मजबूत करती है।

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