कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने जिले में भावांतर योजना के सुचारू एवं पारदर्शी संचालन के लिए आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में किसान संगठनों के पदाधिकारियों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना किसानों के हित में एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और कोई भी किसान अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल पाने से वंचित न रहे।
कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी किसान भाइयों के साथ सतत् समन्वय बनाए रखें और मंडियों में फसलों की खरीदी पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित अधिकारी एवं मंडी प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मंडी में पारदर्शिता और निगरानी पर जोर
कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने निर्देश दिए कि सभी मंडियों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि खरीदी प्रक्रिया पर सतत् निगरानी रखी जा सके। उन्होंने कहा कि निगरानी तंत्र मजबूत होने से किसानों का विश्वास बढ़ेगा और गड़बड़ियों की संभावना शून्य होगी।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिले की सभी सीमाओं पर नाकाबंदी की जाए ताकि बाहरी जिलों एवं राज्यों की उपज जिले की मंडियों में न बिक सके। इससे स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
भावांतर योजना का लाभ और पंजीयन प्रक्रिया
कलेक्टर ने बताया कि भावांतर योजना के अंतर्गत किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक किया जा रहा है। इसके लिए जिले की सहकारी संस्थाओं, विपणन समितियों, एमपी ऑनलाइन कियोस्क, ग्राहक सुविधा केन्द्रों और एमपी किसान एप के माध्यम से पंजीयन कराया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पंजीयन के लिए किसान भाइयों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, जमीन की पावती, बैंक पासबुक और आधार लिंक मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेज लेकर आना आवश्यक है।

कलेक्टर ने यह भी बताया कि भावांतर योजना के तहत पंजीकृत किसान 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक मंडी में अपनी फसल का विक्रय कर सकेंगे। सरकार ने सोयाबीन फसल के लिए ₹5,328 प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया है।
भावांतर योजना के अंतर्गत किसानों को बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच की अंतर राशि 15 दिनों के भीतर उनके बैंक खातों में सीधे जमा की जाएगी।
किसानों को प्रेरित किया प्राकृतिक खेती की ओर
कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने कहा कि किसान यदि प्राकृतिक खेती को अपनाएं तो वे न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देंगे, बल्कि दीर्घकाल में आर्थिक रूप से भी समृद्ध बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।
सुझाव और संवाद से बनेगी योजना प्रभावी
बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापारियों एवं अधिकारियों ने अपने-अपने सुझाव रखे। कलेक्टर ने सभी के सुझावों को गंभीरता से सुना और कहा कि जिला प्रशासन किसान हित में हर संभव कदम उठाएगा।

उन्होंने कहा कि भावांतर योजना का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब अधिकारी, व्यापारी और किसान संगठन आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक किसानों को पंजीयन कराने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
बैठक में उपस्थित अधिकारी और प्रतिनिधि
बैठक में श्री शैलेंद्र सिंह, श्री धीरज सिंह, श्री सत्यजीत सिंह सहित किसान मोर्चा के पदाधिकारी, व्यापारीगण, अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत, उपसंचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी, मंडी बोर्ड के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, एवं किसान संगठन से जुड़े सदस्य उपस्थित थे।
जनजागरूकता पर विशेष बल
कलेक्टर ने बताया कि भावांतर योजना से किसानों को अधिकाधिक लाभांवित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके तहत जिलेभर में बैनर, होर्डिंग, फ्लैक्स, पम्पलेट वितरण, जन-जागरण रैलियां एवं सोशल मीडिया प्रचार जैसे माध्यमों से किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि “सरकार की यह योजना किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिससे किसान अपने परिश्रम का पूरा मूल्य प्राप्त कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।”