भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चित घटनाओं का सिलसिला देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तभी अचानक बिजली गुल हो गई और पूरे हॉल में अंधेरा छा गया। विपक्ष के लिए इस मौके को भुनाना कोई बड़ी बात नहीं थी। पटवारी ने बिजली गुल होते ही अपनी बात बीच में रोकते हुए कहा, “देख लो ये हालात हैं। जब देखो, तब बिजली चली जाती है और कहते हैं 24 घंटे बिजली देंगे।” उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि एक तरफ बहनों को 1500 रुपए देने की बात की जा रही है, जबकि दूसरी ओर भारी-भरकम बिजली बिल थमाए जा रहे हैं।
पटवारी के इस हमले पर सत्ताधारी दल ने पलटवार करते हुए तंज कसा कि पटवारी जी, बिजली के मामले में दिग्विजय सिंह शासन को भी याद कर लें। इस घटना ने दिखाया कि राजनीति में कभी-कभी अप्रत्याशित परिस्थितियां विपक्ष के पक्ष में अवसर बन जाती हैं।

वहीं नरसिंहपुर में कांग्रेस के भीतर मंच पर बवाल हुआ। छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ मुख्य अतिथि थे। जिला कांग्रेस कमेटी रानी अवंतीबाई लोधी के 168वें बलिदान दिवस कार्यक्रम में मंच पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी लाखन सिंह पटेल और उनके रिश्तेदार कपिल पटेल के बीच विवाद शुरू हो गया। नकुलनाथ के मंच से उतरने के बाद गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई, जिसे पुलिस ने मोर्चा संभाल कर शांत किया। इस घटना ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई को उजागर किया।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह ने राघौगढ़ में हल्का-फुल्का माहौल बनाते हुए कार्यकर्ताओं को कचौरी और भजिए खिलाए। उन्होंने मजाक में कहा, “आपके तो दांत ही नहीं हैं,” और एलपीजी गैस संकट पर तंज भी कसा। कार्यकर्ताओं ने हंसते हुए उनकी बात का समर्थन किया। इस मौके पर जयवर्धन ने जनसंपर्क के जरिए अपनी लोकप्रियता भी बढ़ाई।
भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने डिंडौरी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक से निकलने के बाद डिंडौरी का पानी सबसे अधिक प्रदूषित है और 3 साल में पूरा होना वाला सीवरेज प्रोजेक्ट अब 10 साल बाद भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि नेता सलाह दे सकते हैं, लेकिन काम करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। धुर्वे ने नगर पालिका की धीमी कार्यप्रणाली और मुख्यमंत्री द्वारा मंजूर 3 करोड़ रुपए की डीपीआर न बनने पर भी नाराजगी जताई।

इस पूरी स्थिति ने मध्य प्रदेश की राजनीति की जटिलताओं को उजागर किया। कांग्रेस में गुटबाजी और मंच पर विवाद पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाता है, वहीं जयवर्धन सिंह जैसे नेताओं की जनता के बीच हल्की-फुल्की गतिविधियाँ उनकी लोकप्रियता बढ़ाने का तरीका साबित होती हैं। भाजपा विधायक के सीधे सवाल और आलोचना ने प्रशासन की जवाबदेही की कमी भी दिखा दी।