किसानों के हित में मैदान में उतरे खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सेहतगंज उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा !

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भोपाल से सागर जाते समय मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुधवार को रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित गेहूं उपार्जन केंद्र का अचानक औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मंत्री श्री राजपूत स्वयं मैदान में पहुंचे और किसानों से सीधे संवाद करते हुए उपार्जन कार्य की वास्तविक स्थिति को परखा। उनके इस दौरे से प्रशासनिक अमले में सक्रियता देखने को मिली तथा अधिकारियों को किसानों के हित में पूरी गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए गए।

खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने उपार्जन केंद्र पहुंचते ही तुलाई व्यवस्था, खरीदी प्रक्रिया, वारदाने की उपलब्धता, भंडारण व्यवस्था तथा किसानों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने मौके पर ही वारदाने का वजन कराया तथा गेहूं से भरे बोरे की तौल कराकर व्यवस्थाओं की पारदर्शिता की जांच की। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगी और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं पारदर्शी होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री राजपूत ने उपार्जन केंद्र की ऑटो कनेक्टिविटी व्यवस्था को भी परखा और अधिकारियों को इसे सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती है, इसलिए सभी अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने खरीदी के दौरान ऑनलाइन पंजीयन, तुलाई और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

मंत्री श्री राजपूत ने उपार्जन केंद्र पर मौजूद किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अनुभवों को भी जाना। रंगपुर के किसान किशन गोपी और कैलाश यादव ने मंत्री को बताया कि उन्हें उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है तथा उनकी फसल की तुलाई समय पर की जा रही है। किसानों ने केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं और सुविधाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से सहयोग मिल रहा है। किसानों की बात सुनने के बाद मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को सम्मानपूर्वक और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने केंद्र पर कार्यरत कर्मचारियों की कार्यशैली का भी अवलोकन किया। इस दौरान कार्य में कुछ शिथिलता पाए जाने पर उन्होंने संबंधित सर्वे कर्मचारियों वसुंधरा गौर और शिवराज लोधी को कड़ी फटकार लगाई। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि कार्य में तुरंत सुधार लाया जाए और किसानों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

मंत्री श्री राजपूत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के बैठने, पेयजल, छाया और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की मेहनत और उनके योगदान का सम्मान करती है तथा गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ संचालित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सेहतगंज उपार्जन केंद्र के निरीक्षण के बाद खाद्य मंत्री श्री राजपूत रायसेन जिले के रतनपुर स्थित प्रेम वेयर हाउस भी पहुंचे। वहां उन्होंने भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए किसानों और अधिकारियों से चर्चा की। इस दौरान किसान शेख आबिद सहित कई किसानों ने मंत्री को बताया कि उपार्जन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। किसानों ने समय पर तुलाई और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर नियमित निगरानी रखी जाए और किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत रायसेन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमल सोलंकी, जिला आपूर्ति अधिकारी राजू कायुलकर सहित खाद्य विभाग और प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री के इस औचक निरीक्षण से उपार्जन केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ी है तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासनिक सक्रियता भी तेज हुई है।

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