कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात चाहे जैसे भी हों, मंज़िल मिलकर रहती है। ऐसा ही कर दिखाया है सागर जिले की सुरखी विधानसभा के छोटे से गाँव खमकुआ के निवासी यशपाल स्वर्णकार ने।
किसान परिवार से आने वाले इस युवा ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) 2023 की राज्य सेवा परीक्षा में प्रदेश स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का, बल्कि पूरे सागर जिले का नाम रोशन कर दिया है।
यशपाल का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ है।

🌸 सुरखी में गाजे-बाजे और फूल-मालाओं से हुआ स्वागत
रविवार सुबह जब यशपाल अपने गृह क्षेत्र सुरखी पहुँचे, तो नगरवासियों ने उन्हें फूल-मालाओं, मिठाइयों और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत दिया।
पूरा नगर “यशपाल स्वर्णकार जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा।
लोगों ने उनका जुलूस निकाला और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उन्हें बधाई देने उमड़ पड़ा।
सफलता के इस क्षण ने सुरखी और खमकुआ गांव दोनों में उत्सव का माहौल बना दिया।
👨🌾 किसान परिवार से निकला अफसर
यशपाल के पिता रामनरेश स्वर्णकार एक साधारण किसान हैं।
उनका पैतृक गांव खमकुआ है, जहाँ उनका परिवार वर्षों से खेती-बाड़ी करता आया है।
वर्तमान में परिवार सुरखी नगर में निवास करता है।
यशपाल की प्रारंभिक शिक्षा खमकुआ के सरकारी स्कूल में हुई, जबकि कक्षा 9वीं से 12वीं तक उन्होंने शासकीय कृषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सुरखी से पूरी की।
उन्होंने बताया कि उनकी यह सफलता गांव के शिक्षकों, माता-पिता और परिवार के अटूट समर्थन का परिणाम है।
🎓 सरकारी स्कूल से कलेक्टर तक का सफर
यशपाल ने बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2019 से एमपीपीएससी की तैयारी शुरू की थी।
उन्होंने बताया —
“मैंने पाँच प्रयास किए और हर बार कुछ नया सीखा।
इस बार धैर्य और लगन के साथ पूरी निष्ठा से मेहनत की, और ईश्वर ने इसका फल दिया।”
वह वर्ष 2021 में राज्य सेवा परीक्षा में चयनित होकर ऑडिट सेवा में शामिल हुए थे।
फिर 2022 में उनका चयन जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर हुआ।
लेकिन उनका लक्ष्य उच्च प्रशासनिक सेवा था, जिसे उन्होंने 2023 में हासिल कर लिया।
यह उनका तीसरा चयन है।
🏡 परिवार का पहला सरकारी अफसर
यशपाल अपने परिवार में पहले सदस्य हैं जिन्होंने सरकारी सेवा में प्रवेश किया है।
वे दो भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे हैं।
परिवार ने उनकी पढ़ाई के लिए उन्हें इंदौर भेजा, जहाँ रहकर उन्होंने निरंतर अध्ययन किया।
उन्होंने कहा —
“गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुँचना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
युवाओं से मेरा कहना है — उम्मीद कभी मत छोड़ो। अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहो, सफलता अवश्य मिलेगी।”
🌟 पूरा सागर जिला गर्वित
यशपाल की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा सागर जिला गौरवान्वित है।
खमकुआ और सुरखी में लोग मिठाई बाँटते नजर आए।
स्थानीय शिक्षकों ने कहा कि यशपाल की सफलता सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है — यह साबित करता है कि साधारण पृष्ठभूमि से भी असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।