कोलकाता में हुआ साहित्यकार महेश कटारे ‘सुगम’ पर केंद्रित पुस्तक का लोकार्पण, राष्ट्रीय स्तर पर मिली नई पहचान !

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बीना। बीना के सुप्रसिद्ध हिंदी एवं बुंदेली साहित्यकार महेश कटारे ‘सुगम’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का भव्य लोकार्पण कोलकाता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान किया गया। यह विशेष अवसर हिंदी पत्रकारिता के प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तंड के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा था।

कोलकाता के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं और हिंदी भाषा के अध्येताओं की उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन किया गया। समारोह में हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और भारतीय भाषाओं के विकास पर विभिन्न विषयों पर विमर्श भी आयोजित किया गया।

इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देश के 39 साहित्यकारों, आलोचकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने महेश कटारे ‘सुगम’ के साहित्यिक योगदान, व्यक्तित्व, रचनात्मक दृष्टि तथा हिंदी और बुंदेली भाषा के प्रति उनके समर्पण पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। पुस्तक में उनके साहित्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन भी किया गया है, जिससे पाठकों और शोधार्थियों को उनके साहित्यिक अवदान को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।

महेश कटारे ‘सुगम’ लंबे समय से हिंदी और बुंदेली साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति, सामाजिक सरोकार, जनजीवन और क्षेत्रीय संवेदनाओं का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। उनकी साहित्य साधना ने न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि व्यापक हिंदी साहित्य जगत में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

कोलकाता जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साहित्यिक नगर में इस पुस्तक का लोकार्पण होना बीना और पूरे बुंदेलखंड के साहित्यिक समुदाय के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि यह आयोजन बुंदेली भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

साहित्य जगत के जानकारों के अनुसार, किसी साहित्यकार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित पुस्तक का प्रकाशन और उसका राष्ट्रीय मंच पर विमोचन उस लेखक के साहित्यिक योगदान की व्यापक स्वीकृति का प्रतीक होता है। महेश कटारे ‘सुगम’ को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक सफर की उपलब्धि है, बल्कि हिंदी और बुंदेली साहित्य की समृद्ध परंपरा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं और लोक साहित्य भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। महेश कटारे ‘सुगम’ जैसे साहित्यकारों ने अपने लेखन के माध्यम से बुंदेली भाषा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया है। उनके साहित्य पर केंद्रित यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।

कोलकाता में हुए इस लोकार्पण समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बुंदेलखंड की साहित्यिक प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं तथा हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

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