इंदौर। खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियां सोमवार को खोली गईं, जिसमें अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपए गिने जा चुके हैं। नगर निगम परिषद कार्यालय के अधीक्षक प्रदीप दुबे के नेतृत्व में 25 सदस्यीय टीम यह गिनती कर रही है और चौथे दिन भी गिनती जारी है।
मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार, दान पेटियों में बड़ी संख्या में बंद हो चुके 2000 और 500 रुपए के नोट, कुछ नकली नोट, एक मोबाइल, सोने-चांदी के असली और नकली आभूषण, और भगवान गणेश के लिए भक्तों द्वारा लिखे गए पत्र भी मिले हैं। गिनती की प्रक्रिया दो दिन और चलेगी।

दान राशि का उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों में
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि दान राशि की गिनती पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी की कड़ी निगरानी में और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाती है, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे। प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर की धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में किया जाता है।
हालांकि, हर बार दान पेटियों से निकलने वाली राशि कम होती जा रही है, जबकि मंदिर प्रबंधन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। मंदिर में क्यूआर कोड से दान की सुविधा है, लेकिन कोड ऐसी जगह लगे हैं जहां वे कम दिखाई देते हैं।

भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र
खजराना गणेश मंदिर इंदौर का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दिसंबर के अंत और नववर्ष पर यहां भारी भीड़ रहती है। मंदिर न केवल आम भक्तों, बल्कि राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों, खिलाड़ियों और बॉलीवुड हस्तियों की आस्था का केंद्र भी है।
मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने कहा, “भगवान गणेश के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था इतनी गहरी है कि हर बार दान पेटियां खुलने पर बड़ी मात्रा में धनराशि और मूल्यवान वस्तुएं मिलती हैं।”
इतिहास और भीड़
यह मंदिर होलकर राजघराने की महारानी अहिल्याबाई ने 1735 में बनवाया था। मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ बुधवार को होती है, इसके अलावा शनिवार और रविवार को भी काफी संख्या में भक्त आते हैं। गणेश चतुर्दशी के 10 दिन और तिल चतुर्थी के समय भी यहां रोजाना हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं।