बीना के समीप खुरई क्षेत्र के जगदीशपुरा स्थित हनुमान मंदिर के पास चल रहे निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मंदिर परिसर की बाउंड्री वॉल तोड़ने और धार्मिक स्थल की व्यवस्था प्रभावित करने के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित किया।
मामला उस समय गर्मा गया जब स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि मंदिर के समीप चल रहे निर्माण कार्य के दौरान मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि धार्मिक स्थल की पवित्रता और व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, जगदीशपुरा क्षेत्र में हनौता बांध से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए मकानों का निर्माण कराया जा रहा है। यह निर्माण कार्य एक निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मंदिर के पुजारी हिमांशु दुबे और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान मंदिर परिसर से जुड़ी यज्ञशाला और कुछ अन्य ढांचे तोड़ दिए गए थे। उस समय कंपनी की ओर से आश्वासन दिया गया था कि सभी धार्मिक संरचनाओं का दोबारा निर्माण कराया जाएगा, लेकिन अब तक वह वादा पूरा नहीं किया गया।
संगठनों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में प्रशासन और कंपनी की ओर से दो मंदिरों को स्थानांतरित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब तीसरे मंदिर के निर्माण और संरचना में बदलाव की जानकारी सामने आ रही है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों को लेकर स्पष्ट योजना सार्वजनिक नहीं की गई और न ही मंदिर समिति से पूरी सहमति ली गई।
विवाद का मुख्य कारण मंदिर की बाउंड्री वॉल को लेकर भी सामने आया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निर्माण कंपनी मंदिर की दीवार तोड़कर अपने निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके अलावा मंदिर में बिजली आपूर्ति के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर और पानी की टंकी का उपयोग निर्माण कार्य में किया जा रहा है, जिससे मंदिर की दैनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर काम कर रहे कुछ मजदूरों और कर्मचारियों द्वारा अनुचित व्यवहार किया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन शिकायतों के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और लोगों को समझाइश देकर स्थिति शांत कराई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर समिति और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों से चर्चा की। पुलिस ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रौनक यादव ने बताया कि कंपनी ने पहले सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि मंदिर समिति की सहमति और धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा, लेकिन अब कंपनी अपने वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उप जिलाधिकारी से चर्चा की गई है और गुरुवार को मंदिर परिसर में बैठक आयोजित कर समाधान निकालने की बात कही गई है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की है। वहीं स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर की संरचना या व्यवस्थाओं से छेड़छाड़ की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। आने वाली बैठक में मंदिर समिति, प्रशासन और निर्माण कंपनी के बीच सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।