भगवां // ग्राम पंचायत रामटौरिया का गुल्लन खेरा गाँव सोमवार सुबह गहरे शोक और क्रोध से भर उठा, जब बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही ने एक मेहनतकश परिवार की खुशियाँ छीन लीं। सुबह करीब 11 बजे ट्रांसफार्मर पर काम कर रहे प्राइवेट बिजली कर्मचारी हरबल लोधी (40 वर्ष) की करंट लगने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना अचानक और भयावह था कि देखते ही देखते पूरा गाँव मातम और आक्रोश से भर गया।

कैसे हुआ हादसा – शटडाउन की चूक साबित हुई जानलेवा
गाँव में लगे ट्रांसफार्मर में आवश्यक मरम्मत कार्य करने के लिए हरबल लोधी पहुँचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—
- हरबल ने काम शुरू करने से पहले लाइन बंद कराने के लिए विभाग को सूचना दी थी।
- लेकिन या तो शटडाउन लिया ही नहीं गया, या लापरवाही के कारण अचानक लाइन चालू कर दी गई।
- जैसे ही हरबल ने तार पकड़ा, तेज करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए
- मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
हरबल कई वर्षों से बिजली विभाग के कार्य से जुड़े हुए थे और अपनी ईमानदारी और मेहनती स्वभाव के लिए गाँव में जाने जाते थे।
गाँव में मातम और गुस्से का माहौल
हादसे के बाद घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने स्पष्ट कहा—
“ये हादसा नहीं, विभाग की खुली लापरवाही है। प्राइवेट कर्मचारियों की जान की कोई कीमत नहीं है।”
हरबल लोधी की मौत की खबर सुनते ही गाँव में तनाव फैल गया। ग्रामीणों ने:
- विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की
- विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया
- कई ग्रामीण धरने पर बैठ गए
लोगों का कहना था कि अगर विभाग समय पर शटडाउन लेता तो यह हादसा नहीं होता।
ग्रामीणों की माँगें – 304 के तहत FIR और तत्काल गिरफ्तारी
ग्रामीणों ने साफ कहा कि—
- जिस अधिकारी या कर्मचारी की वजह से शटडाउन में चूक हुई
- उसके खिलाफ धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) का मामला दर्ज किया जाए
- और तत्काल गिरफ्तारी की जाए
इसके साथ ही गाँव वालों ने दो बड़ी माँगें रखीं—
- मृतक परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक यह माँगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

प्रशासन और पुलिस दबाव में – सुरक्षा के मद्देनज़र बल तैनात
गाँव में बढ़ते तनाव को देखते हुए:
- पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया
- प्रशासन ने ग्रामीणों को शांत कराने की कोशिश की
- अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि “जांच की जाएगी”, लेकिन ग्रामीण सख्त रुख पर कायम हैं
उनका कहना है—
“जांच नहीं, कार्रवाई चाहिए, वरना विरोध और तेज किया जाएगा।”
हरबल लोधी की मौत से टूटा परिवार – गाँव में शोक की लहर
हरबल की मौत से उनका परिवार बिखर गया है। घर पर पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़ी माँ का रो-रोकर बुरा हाल है।
गाँव के लोग कह रहे हैं—
“हरबल गाँव में रोशनी पहुँचाता था, आज वही अंधेरी लापरवाही का शिकार बन गया।”
ग्राम में शोक का माहौल है, और हर किसी की आँखों में एक ही सवाल—
“आखिर कब तक प्राइवेट कर्मचारियों की जान यूँ ही जोखिम पर रहेगी?”

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह घटना बिजली विभाग की:
- बेरहम कार्यशैली
- प्राइवेट कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी
- शटडाउन प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ
जैसे मुद्दों को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन किसी अधिकारी पर कठोर कार्रवाई न होने के कारण ये घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।