सागर। ग्राम पठारी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में युवा नेता अविराज सिंह ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में मानव जीवन का मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज में बढ़ती स्वार्थ, छल-कपट और भोग-विलास की प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं और ग्रामीणों को धर्म, संस्कार और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम आध्यात्मिक वातावरण और धार्मिक भक्ति से सराबोर दिखाई दिया। इस दौरान अविराज सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में समाज तेजी से भौतिकवाद की ओर बढ़ रहा है, जहां व्यक्ति अपने कर्तव्यों और संस्कारों को भूलता जा रहा है। ऐसे दौर में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन आदर्श समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, सेवा और कर्तव्य पालन का सर्वोत्तम उदाहरण है। राम ने अपने व्यक्तिगत सुख से ऊपर उठकर समाज और परिवार के लिए हर कठिनाई को स्वीकार किया। उन्होंने वनवास का उदाहरण देते हुए कहा कि संघर्ष और तपस्या ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं। इतिहास सदैव उन्हीं लोगों को याद रखता है जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन किया और समाज के लिए आदर्श स्थापित किए।

अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का वनवास केवल एक दंड नहीं था, बल्कि वह जीवन को तपस्या और अनुशासन से जोड़ने का संदेश था। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भी कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान, नीति और धर्म के महान शिक्षक हैं। महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने बिना शस्त्र उठाए नीति, बुद्धिमत्ता और धर्म के मार्ग से विजय का रास्ता दिखाया। उन्होंने गीता के संदेश को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि कर्म, ज्ञान और भक्ति का संतुलन ही मनुष्य को सफलता और आत्मिक शांति प्रदान करता है।
अविराज सिंह ने कहा कि आज समाज में बाहरी भक्ति प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है, लेकिन वास्तविक आचरण और आत्मिक शुद्धता का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे की भक्ति और भीतर विषय-वासनाओं में डूबे रहना वास्तविक धर्म नहीं है। धर्म का अर्थ है सत्य, सेवा, संयम और कर्तव्य पालन।
उन्होंने कहा कि यह धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों को मजबूत करना है। इस प्रकार के कार्यक्रम लोगों को एकजुट करते हैं और समाज में सकारात्मक सोच का निर्माण करते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के सहयोग की सराहना भी की।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सेवा का भी विशेष संदेश दिया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए अविराज सिंह ने 32 जरूरतमंद परिवारों को पंखों का वितरण किया। पंखे प्राप्त करने वाले परिवारों ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे राहत और सहयोग का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। वितरण के समय ग्रामीणों में उत्साह और प्रसन्नता का माहौल देखने को मिला।
ग्रामीणों ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सेवा के कार्य समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने अविराज सिंह के विचारों और सामाजिक पहल की सराहना की।
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आध्यात्मिकता और सामाजिक जागरूकता का वातावरण बना रहा। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इसे समाज को संस्कारों और धर्म से जोड़ने वाला प्रेरणादायी आयोजन बताया।