बीना में दो मोर्चों पर आंदोलन तेज: फ्लाई ऐश से परेशान किसान तहसील में धरने पर, स्टेशन के बाहर पार्षद और फुल्की विक्रेता का प्रदर्शन !

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बीना। बीना में शुक्रवार से दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। एक ओर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसान जेपी थर्मल पावर प्लांट से उड़ रही फ्लाई ऐश के विरोध में तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं, वहीं दूसरी ओर रेलवे स्टेशन के बाहर बीडी रजक आरपीएफ की कार्रवाई के विरोध में धरना दे रहे हैं। उनके समर्थन में एक फुल्की विक्रेता भी आंदोलन में शामिल हो गया है।

किसानों का आरोप है कि थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश आसपास के गांवों और खेतों तक पहुंच रही है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है और खेती प्रभावित हो रही है। धरने पर बैठे किसान संगठन के जिलाध्यक्ष प्रतिपाल ने बताया कि फ्लाई ऐश के महीन कण फसलों की पत्तियों पर जम जाते हैं, जिससे पौधों की प्राकृतिक वृद्धि प्रभावित हो रही है और उत्पादन लगातार घटता जा रहा है।

किसानों का कहना है कि खेतों में उड़कर पहुंच रही राख से उनकी फसलें खराब हो रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लांट के राख डंपिंग स्थल से राख पानी के माध्यम से जमीन के भीतर पहुंच रही है, जिसके कारण भूमिगत जल भी दूषित हो रहा है।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि राख के कण गांवों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में चर्म रोग और श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

धरना दे रहे किसानों ने प्रशासन से फ्लाई ऐश की समस्या का स्थायी समाधान, प्रभावित ग्रामीणों के इलाज की व्यवस्था और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि आंदोलन के दूसरे दिन भी कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे चर्चा करने नहीं पहुंचा, जिससे उनमें नाराजगी और बढ़ गई है।

इधर रेलवे स्टेशन के बाहर दूसरा आंदोलन भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बीडी रजक ने आरपीएफ और रेलवे अधिकारियों के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पार्षद का आरोप है कि एक रेलवे अधिकारी के दबाव में आरपीएफ ने 9 अप्रैल को उनके खिलाफ चेन पुलिंग का झूठा मामला दर्ज किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान ऑन ड्यूटी आरपीएफ एसआई ने उन्हें पोस्ट पर ले जाकर अभद्र व्यवहार किया और धक्का-मुक्की की। साथ ही रुपए मांगने का भी आरोप लगाया गया। पार्षद का कहना है कि जब उन्होंने 10 अप्रैल को जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई तो उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पार्षद बीडी रजक ने कहा कि जब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर उनके समर्थन में स्थानीय लोग भी पहुंच रहे हैं।

धरने के दौरान कृष्णा सेन भी पार्षद के समर्थन में आंदोलन में शामिल हो गए। कृष्णा सेन, जो शहर में फुल्की बेचकर अपना जीवनयापन करते हैं, ने आरोप लगाया कि 14 मार्च को छोटी बजरिया जाते समय आरपीएफ कर्मियों ने उन्हें रेलवे कॉलोनी के पास रोक लिया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे 700 रुपए की मांग की गई। रुपए नहीं देने पर उन्हें आरपीएफ पोस्ट ले जाकर साइन क्रॉसिंग का मामला बना दिया गया। कृष्णा सेन का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर सिविल कोर्ट में परिवाद भी प्रस्तुत किया है।

उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे आंदोलन जारी रखेंगे। कृष्णा सेन के धरने में शामिल होने के बाद यह मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है।

बीना में एक साथ चल रहे इन दोनों आंदोलनों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर किसान पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रेलवे अधिकारियों के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधि और आम नागरिक धरने पर बैठे हैं।

फिलहाल दोनों ही आंदोलनों में प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्रशासन की ओर से किसी ठोस समाधान का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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