भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर ग्राम बड़तूमा पेन थाना मकरोनिया तथा अनुसूचित जाति–अनुसूचित जनजाति छात्रावास बड़तूमा में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी तथा छात्राओं ने भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों और उनके अमर योगदान को स्मरण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और सेवा जोहार के जयघोष के साथ हुई। इसके बाद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्रमवार संबोधन देते हुए बताया कि कैसे भगवान बिरसा मुंडा ने समाज, संस्कृति, देश और विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और एक मजबूत चेतना का संचार किया।
छात्राओं को दिया गया ऐतिहासिक परिचय
छात्रावास में उपस्थित छात्राओं को बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष, उनके क्रांतिकारी विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका तथा सामाजिक न्याय की स्थापना हेतु किए गए प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

- बताया गया कि वे कठिन परिस्थितियों और जेल प्रसंग के बावजूद अपने आदर्शों से नहीं डिगे।
- उन्होंने सदैव जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की पहचान माना तथा उसकी रक्षा के लिए प्रखर नेतृत्व किया।
- विद्यार्थियों को उनके उलगुलान आंदोलन की ऐतिहासिक महत्ता और राष्ट्रवाद की भावना से परिचित कराया गया।
बिरसा मुंडा: संघर्ष और प्रेरणा
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भगवान बिरसा मुंडा—
- 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातु में जन्मे।
- ब्रिटिश शासन, जमींदारी प्रथा और ईसाई मिशनरियों के दबाव के विरुद्ध डटकर खड़े हुए।
- 1890–1900 के दौरान उलगुलान आंदोलन चलाकर आदिवासियों में जागृति का संचार किया, जिसके कारण उन्हें ‘धरती आबा’ की उपाधि मिली।
उनकी वीरता, त्याग और संघर्ष की स्मृति में 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है।
वितरण कार्यक्रम
कार्यक्रम के अंत में छात्रावास की छात्राओं को फल एवं पेन का वितरण किया गया, जिससे वातावरण में हर्ष और आत्मीयता का भाव व्याप्त हुआ।
उपस्थित dignitaries
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- संबल सिंह मरकाम (सह-संचालक, ऑडिट विभाग)
- थान सिंह टेकाम (लोक निर्माण विभाग, सागर)
- विजय सिंह गोंड (शिक्षक)
- हॉस्टल अधीक्षक एवं समस्त स्टाफ
- पुष्पेंद्र मरकाम, पुष्पेंद्र मसकोले, कैलाश मसकोले, डी.एस. उइके, सुरेश उइके
- भुवन मरावी, राजेश बरकड़े, विश्राम सिंह गोंड
- रामगोपाल परते, पुष्पेंद्र सिंह मरकाम, रामदास धुर्वे
- जाहर सिंह उल्लाडी, सुरेंद्र अहिरवार, बृजेंद्र अहिरवार
- सुशील ठिठौरिया
कार्यक्रम ने छात्राओं में जनजातीय इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति गर्व और जागरूकता का भाव पैदा किया।