जबलपुर में बच्चों की शतरंज प्रतियोगिता, 150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा !

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जबलपुर में बच्चों की बौद्धिक प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से ‘ग्रिप एंड ग्लोरी’ टर्फ में एक भव्य शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जबलपुर के साथ-साथ कटनी, उमरिया और आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 150 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का माहौल पूरी तरह अनुशासन, एकाग्रता और खेल भावना से भरा रहा।

आयोजकों ने बच्चों की उम्र और कक्षा के अनुसार अलग-अलग वर्गों में मुकाबले रखे। नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक, यानी लगभग 16 वर्ष की आयु तक के प्रतिभागियों ने अपने-अपने वर्ग में शतरंज की बिसात पर दिमागी जंग लड़ी। प्रतियोगिता में कुल आठ राउंड खेले जाने हैं, जिनमें से पहले दिन चार राउंड पूरे हुए।

प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे दिव्यांश ने बताया कि वह पिछले तीन साल से शतरंज खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक खेले गए चार मुकाबलों में से दो में उन्हें जीत मिली है, जबकि दो मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। दिव्यांश ने आगे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई और कहा कि ऐसे टूर्नामेंट से सीखने का अच्छा मौका मिलता है।

मझौली से आईं डॉ. शैलजा ने प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा कि शतरंज जैसे खेल बच्चों के मानसिक विकास में बेहद सहायक होते हैं। इससे बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता, एकाग्रता और तार्किक सोच मजबूत होती है। साथ ही यह खेल बच्चों को मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों की लत से दूर रखने में भी मदद करता है।

वहीं, अभिभावक प्रष्मित कौर ने भी आयोजन की तारीफ करते हुए कहा कि आज के समय में जब बच्चे ज्यादा समय मोबाइल और कंप्यूटर पर बिताते हैं, तब शतरंज जैसे खेल उन्हें स्क्रीन से दूर रखकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों के आत्मविश्वास और धैर्य को भी बढ़ाती हैं।

इस शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन प्रियांश, तेजल और कोच जॉनी के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में शतरंज के प्रति रुचि बढ़ाना और उनकी बौद्धिक क्षमताओं को निखारना है। प्रतियोगिता के समापन पर विजेता खिलाड़ियों को मेडल और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा।

कुल मिलाकर, जबलपुर में आयोजित यह शतरंज प्रतियोगिता न केवल बच्चों के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक मंच साबित हुई, बल्कि अभिभावकों और समाज को यह संदेश भी दिया कि बौद्धिक खेल बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

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