ग्वालियर जिला न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगाए गए दो लाख रुपए के जुर्माने के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज एवं खाद्य सुरक्षा अपीलीय प्राधिकारी ने माना कि अपील निर्धारित समय सीमा से 25 दिन की देरी से दायर की गई, और देरी का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।

मामला नीलेश चौबे का है, जिन पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26(2) सहपठित धारा 51 के तहत दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। यह आदेश 28 नवंबर 2024 को पारित हुआ था, जिसकी प्रति उन्हें 5 दिसंबर 2024 को मिली थी। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में अपील 30 दिनों के भीतर दायर करना अनिवार्य है, लेकिन उन्होंने अपील 28 जनवरी 2025 को दायर की।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता देरी का दिन-प्रतिदिन का विवरण नहीं दे सके। चौबे ने खुद को गरीब और अशिक्षित बताकर देरी माफी की मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने इस तर्क को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना।
अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि बिना ठोस और विश्वसनीय आधार के देरी माफ नहीं की जा सकती। इसलिए देरी माफी आवेदन और मुख्य अपील—दोनों को खारिज कर दिया गया। फैसले के बाद अब नीलेश चौबे के लिए दो लाख रुपए का जुर्माना भरना अनिवार्य होगा।