सागर – इंडो-जर्मन द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग के अंतर्गत संचालित परियोजना “भारत में कृषि-पारिस्थितिक परिवर्तन प्रक्रियाओं हेतु समर्थन” के तहत जीआईज़ेड (GIZ) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री हैंस क्लेन एवं मध्यप्रदेश प्रभारी टीम ने सागर जिले में 2 दिवस के प्रवास पर शनिवार दिनांक 25 अप्रैल को सागर जिले के विकासखंड शाहगढ़ में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से संवाद किया, प्राकृतिक खेती को और सक्रिय बनाने हेतु किसानों से चर्चा की गई साथ ही प्राकृतिक खेती में आ रही समस्याओं के समाधान पर मंथन हुआ।
रविवार दिनांक 26 अप्रैल को जिले के खुरई विकासखंड में लघु कृषि उपकरण निर्माता इकाइयों का निरीक्षण किया।
GIZ द्वारा मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित कर्नाटक एवं असम राज्यों में प्राकृतिक खेती और कृषि-पारिस्थितिक परिवर्तन प्रक्रियाओं को तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

टीम जी आई जैड द्वारा खुरई में हुए निरीक्षण का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर निर्मित कृषि यंत्रों की प्रकृति, उपयोगिता एवं उनके विकास की संभावनाओं का आकलन करना था। साथ ही जर्मनी के कृषि उपकरण निर्माताओं के साथ संभावित सहयोग के अवसरों का परीक्षण भी किया गया, जिससे कृषि प्रक्रियाओं को अधिक सुदृढ़ बनाकर किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाया जा सके।
इस अवसर पर जीआईज़ेड मध्यप्रदेश के अधिकारी श्री अशोक कुमार, श्री मृदुल भार्गव, श्री हरिओम निराला एवं श्री प्राण रंजन उपस्थित रहे। नई दिल्ली कार्यालय से सुश्री पारुल थापा एवं श्री अविरल सक्सेना भी कार्यक्रम में सहभागी बने।
सागर जिले के उपसंचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी एवं अनुविभागीय कृषि अधिकारी खुरई श्री जय दत्त शर्मा सहित कृषि विभाग के अधिकारियों ने टीम को विभिन्न इकाइयों का अवलोकन कराया तथा प्राकृतिक खेती एवं कृषि यंत्रीकरण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।

व्यापक कार्यशाला के आयोजन पर विचार
भ्रमण के प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर कृषि यंत्रों की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग एवं जीआईज़ेड के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक कार्यशाला आयोजित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में संभावित हस्तक्षेपों पर भी विमर्श प्रारंभ किया गया है।
भ्रमण के दौरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर जर्मनी देश के
श्री हैंस क्लेन ने स्थानीय नवाचारों में गहरी रुजर्मनी मूल केचि व्यक्त करते हुए भविष्य में सहयोग की संभावनाओं को साकार करने हेतु सकारात्मक प्रयासों पर बल दिया साथ ही जिले में संचालित प्राकृतिक जैविक हाट बाज़ार परिकल्पना की सराहना की।