भोपाल। राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम सोमवार को पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को साथ लेकर घटनास्थल पर पहुंची। यहां जांच अधिकारियों ने करीब 80 किलो वजन की डमी का उपयोग कर पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन किया और यह समझने की कोशिश की कि ट्विशा की मौत के समय वास्तव में क्या परिस्थितियां रही होंगी।
सीबीआई टीम सुबह घटनास्थल पर पहुंची और घर के अंदर उस स्थान का बारीकी से निरीक्षण किया जहां ट्विशा का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। जांचकर्ताओं ने डमी को उसी प्रकार फंदे पर लटकाकर और बाद में नीचे उतारकर घटनाक्रम का परीक्षण किया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उपलब्ध बयानों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और घटनास्थल की परिस्थितियों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था।
आत्महत्या या हत्या? जांच का सबसे बड़ा सवाल
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही यह मामला आत्महत्या और हत्या के बीच उलझा हुआ है। समर्थ का दावा है कि ट्विशा ने गर्भपात के बाद मानसिक तनाव और अवसाद के कारण आत्मघाती कदम उठाया था। हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी हैं।

सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यदि यह आत्महत्या थी तो उसके पीछे तत्काल कारण क्या थे और यदि मामला हत्या का है तो घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियां क्या संकेत देती हैं। इसी उद्देश्य से घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण किया गया।
एफआईआर के बाद तीन दिन भोपाल में रहा समर्थ
जांच के दौरान सीबीआई को यह जानकारी भी मिली है कि 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ तुरंत शहर से बाहर नहीं गया था। सूत्रों के अनुसार वह करीब तीन दिन तक भोपाल में ही विभिन्न स्थानों पर रहा और बाद में जबलपुर पहुंचा, जहां उसने लगभग पांच दिन तक समय बिताया।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था, किसने उसकी मदद की और फरारी के दौरान उसकी गतिविधियां क्या थीं। इसके लिए मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण किया जा रहा है।
डॉक्टर से भी होगी पूछताछ
मामले में गर्भपात का मुद्दा भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी तलब किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को गर्भपात संबंधी सलाह दी थी।

जांचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि गर्भपात की चिकित्सकीय परिस्थितियां क्या थीं, उसके बाद ट्विशा की मानसिक और शारीरिक स्थिति कैसी थी और क्या इसका संबंध मौत से पहले की परिस्थितियों से जुड़ता है।
घटनास्थल से अस्पताल तक की टाइमलाइन तैयार
सीबीआई समर्थ से लगातार पूछताछ कर रही है कि उसने सबसे पहले ट्विशा को किस अवस्था में देखा, उसे फंदे से किसने उतारा, उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल पहुंचने तक क्या-क्या घटनाएं हुईं।
जांच एजेंसी इन बयानों का इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों से मिलान कर रही है ताकि घटनाओं की सटीक टाइमलाइन तैयार की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि घटनास्थल से अस्पताल तक की हर कड़ी को जोड़ना जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
फरारी में मदद करने वालों की तलाश
सीबीआई अब उन लोगों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचाई हो सकती है। जांच एजेंसी मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल संचार के माध्यम से संभावित सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका फरारी में सहायता करने की सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
गिरिबाला सिंह से भी हो रही पूछताछ
मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल की परिस्थितियों, शव पर मिले चोटों के निशान और घटना के बाद की गतिविधियों को लेकर कई सवालों के जवाब तलाश रही है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई सभी पक्षों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्टों का मिलान कर रही है ताकि किसी भी विरोधाभास की पहचान की जा सके।
जांच निर्णायक चरण में
ट्विशा शर्मा डेथ केस प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में से एक बन चुका है। घटनास्थल पर डमी के जरिए किया गया रीक्रिएशन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सीबीआई अब जांच के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दे रही है।
फिलहाल एजेंसी आत्महत्या और हत्या दोनों संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ से जुड़े निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।