शुक्रवार को पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) पंकज त्यागी ने रानी कमलापति से बीना रेलखंड तक विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेलखंड की संरचनात्मक स्थिति, ट्रैक की गुणवत्ता, सिग्नलिंग प्रणाली, रेलवे क्रॉसिंग, सेफ्टी से जुड़ी अवसंरचनाओं सहित विभिन्न तकनीकी और परिचालन पहलुओं का गहन अवलोकन किया।
निरीक्षण के क्रम में डीआरएम ने बीना स्टेशन का विशेष रूप से दौरा किया और वहां उपलब्ध यात्री सुविधाओं, परिचालन व्यवस्था तथा संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया और साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बुकिंग कार्यालय, पे-एंड-यूज यात्री शौचालय, पेयजल की उपलब्धता, प्लेटफॉर्म पर स्थित खानपान स्टॉल, ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम) की कार्यशीलता तथा स्टेशन परिसर की समग्र व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

मंडल रेल प्रबंधक ने यात्रियों की सुविधा और संतुष्टि को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्री सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जाना आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान डीआरएम ने लोको पायलट एवं गार्ड के संयुक्त क्रू-लाबी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा उन्हें और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने रनिंग स्टाफ से सीधे संवाद कर ट्रेन संचालन से जुड़े उनके अनुभव, समस्याएं और सुझाव भी सुने।
इसके अतिरिक्त डीआरएम पंकज त्यागी ने बीना स्टेशन के यार्ड रिमॉडलिंग कार्य का भी विस्तृत निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कार्य को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में परिचालन क्षमता और संरक्षा में और सुधार हो सके।
इस निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक रोहित मालवीय, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी विजय शंकर गौतम, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (उत्तर) सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। रेलवे अधिकारियों ने डीआरएम को अपने-अपने विभागों से संबंधित जानकारी दी और चल रहे कार्यों की स्थिति से अवगत कराया।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि इस तरह के निरीक्षणों से न केवल रेल परिचालन और संरक्षा को मजबूती मिलती है, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है।