कर्रापुर क्षेत्र में पुलिस की कथित लापरवाही के चलते एक साधारण विवाद गंभीर आपराधिक घटना में तब्दील हो गया, जिसका अंत एक युवक की मौत के रूप में हुआ। इस घटना से स्वर्णकार समाज में भारी रोष व्याप्त है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक, सागर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कर्रापुर निवासी सराफा व्यापारी जितेंद्र सोनी के नाबालिग पुत्र हर्ष सोनी और आदर्श सोनी का पड़ोस में रहने वाले मेडिकल संचालक मूलचंद विश्वकर्मा से बैडमिंटन खेलते समय शटलकॉक घर में चले जाने को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि इस मामूली विवाद के दौरान मूलचंद विश्वकर्मा ने दोनों नाबालिग बच्चों के साथ डंडों से बेरहमी से मारपीट की। इस हमले में हर्ष सोनी के एक कान की सुनने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई, जिससे परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा।

परिजनों का आरोप है कि घटना की सूचना पुलिस को तत्काल दी गई, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसी लापरवाही का परिणाम यह हुआ कि अगले ही दिन आकाश राय और उसके साथियों ने जितेंद्र सोनी पर लोहे की रॉड, डंडों और अन्य हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में जितेंद्र सोनी गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए भोपाल स्थित नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 दिनों तक चले उपचार के बाद गुरुवार को उनकी मौत हो गई। इस दुखद घटना से न केवल सोनी परिवार बल्कि पूरे स्वर्णकार समाज में शोक और आक्रोश का माहौल है।

स्वर्णकार समाज का कहना है कि यदि पुलिस ने पहली घटना के बाद ही सख्ती से कार्रवाई की होती, तो यह जानलेवा हमला और हत्या जैसी गंभीर घटना रोकी जा सकती थी। समाज ने आरोप लगाया कि 22 दिसंबर की घटना में पुलिस ने केवल एक व्यक्ति को आरोपी बनाया, जबकि वास्तव में इस पूरे मामले में पांच से अधिक लोग शामिल थे।

समाज की प्रमुख मांगों में घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर उनके नाम एफआईआर में जोड़ना, मुख्य आरोपी आकाश राय को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजना तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और गंभीर जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करना शामिल है।
ज्ञापन सौंपते समय स्वर्णकार समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन द्वारा शीघ्र और न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। समाज ने स्पष्ट किया कि वे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।