दमोह के ग्रामीण इलाकों में गहराया जल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग !

Spread the love

दमोह। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों भीषण जलसंकट ने लोगों की जिंदगी मुश्किलों से भर दी है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर तेंदूखेड़ा जनपद के इमलीडोल गांव में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है, जहां ग्रामीणों को पीने के पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में पिछले 15 दिनों से पेयजल परियोजना बंद पड़ी है, जिसके कारण पूरे गांव में पानी की भारी किल्लत हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के अधिकांश हैंडपंप रुक-रुक कर पानी दे रहे हैं, जबकि कई हैंडपंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं। गांव के कुएं और अन्य जलस्रोत भी सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। जो थोड़ा बहुत पानी बचा है, वह दूषित हो चुका है और पीने योग्य नहीं रह गया है। मजबूरी में ग्रामीण दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

सुबह से शुरू हो जाती है पानी की तलाश

गांव के निवासी मुकेश यादव और गुड्डू यादव ने बताया कि गांव में हालात इतने खराब हैं कि लोग सुबह सूरज निकलने से पहले ही पानी की तलाश में निकल जाते हैं। कई घंटे भटकने के बाद भी मुश्किल से एक या दो पिक्का पानी मिल पाता है। इसके बाद लोग उसी पानी से पीने, खाना बनाने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हर साल पानी की समस्या होती है, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं ज्यादा भयावह हैं। गांव के अधिकांश जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं और वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

हैंडपंपों पर लग रही लंबी लाइनें

जुगराज ठाकुर और सीताराम ठाकुर ने बताया कि गांव में जो कुछ हैंडपंप चालू हैं, वहां सुबह से ही लंबी लाइनें लग जाती हैं। कई लोग दो-दो दिन तक पानी भरने के इंतजार में बैठे रहते हैं, लेकिन उन्हें पानी नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि पूरे दिन हैंडपंप चलाने के बाद भी केवल उन्हीं लोगों को पानी मिल पाता है, जिनका नंबर पहले से लगा होता है।

महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है क्योंकि परिवार के सदस्य दिनभर पानी की व्यवस्था में लगे रहते हैं।

मवेशियों पर भी संकट

जलसंकट का असर केवल लोगों पर ही नहीं बल्कि मवेशियों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी के अभाव में पशु प्यास से तड़प रहे हैं। कई मवेशियों की हालत खराब हो चुकी है और कुछ पशुओं की मौत होने की भी बात सामने आई है। खेतों में कामकाज भी प्रभावित हो रहा है क्योंकि पशुओं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और विकराल हो सकते हैं। गांव में टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

प्रशासन ने दिए सुधार के निर्देश

तेंदूखेड़ा जनपद के सीईओ मनीष बागरी ने बताया कि इमलीडोल गांव में पानी की समस्या की जानकारी मिली है। जल सप्लाई व्यवस्था में कुछ तकनीकी कमी आने के कारण परेशानी हुई है। उन्होंने कहा कि जल निगम के अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत मिल सके।

पथरिया में भी हालात गंभीर

दमोह जिले के पथरिया क्षेत्र में भी जलसंकट लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां पिछले पांच दिनों से पानी की सप्लाई बंद है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित वार्ड क्रमांक 14 और 15 के निवासी हैं। इन क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी कॉलोनियां बनी हुई हैं, जहां सैकड़ों परिवार रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां 8 से 10 दिन के अंतराल में पानी की लाइन में सप्लाई होती है। ऐसे में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवार महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं।

करीब 15 दिन पहले क्षेत्र के लोगों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर खाली मटके फोड़कर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके बावजूद नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन आश्वासन तो दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा।

ग्रामीणों और नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल संकट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और गर्मी के इस मौसम में उन्हें पानी के लिए दर-दर भटकना न पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *