Damoh में सामने आए फर्जी एमबीबीएस डिग्री मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने अब पांचवीं गिरफ्तारी करते हुए भोपाल स्थित नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कार्यालय में कार्यरत एक आईटी असिस्टेंट को गिरफ्तार किया है। वहीं फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टरी कर रहे तीन आरोपियों को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान आदिल खान के रूप में हुई है, जो भोपाल में एनएचएम कार्यालय में आईटी संबंधी कार्य देखता है। उसे गिरफ्तार कर मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में फर्जी डिग्री नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
इस मामले का मुख्य आरोपी हीरा सिंह कौशल को माना जा रहा है, जो फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। जांच एजेंसियों का मानना है कि फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के इस पूरे नेटवर्क के संचालन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

Anand Kaladgi ने बताया कि मुख्य आरोपी हीरा सिंह कौशल के घर पर छापेमारी के दौरान करीब 40 लाख रुपए कीमत की दो लग्जरी कार और 5 लाख 36 हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि फर्जीवाड़े से अर्जित धन से ही इन संपत्तियों को खरीदा गया था।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है, जिससे इस पूरे नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचना आसान होगा। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जी डिग्रियों का निर्माण, सत्यापन और उपयोग किस स्तर तक फैला हुआ था।
वहीं गिरफ्तार आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आदिल खान का कहना है कि उसका कार्य केवल वेबसाइट पर सरकारी आदेश और तकनीकी सूचनाएं अपलोड करना है। उसने दावा किया कि वह किसी भी आरोपी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता और केवल किसी के नाम लेने के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आदिल ने कहा कि इस कार्रवाई से उसका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

दूसरी ओर, मुख्य आरोपी बताए जा रहे हीरा सिंह कौशल ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि वह स्वयं एक सरकारी अस्पताल में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत है और उसके सभी दस्तावेज वैध हैं। उसने दावा किया कि जेल भेजे गए तीनों डॉक्टरों से उसका कोई संबंध नहीं है और उनके पास उसका मोबाइल नंबर तक नहीं है।
पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला करीब एक सप्ताह पहले सामने आया था, जब दमोह के एक निजी अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे दो लोगों को पकड़ा गया। प्रारंभिक जांच में कुमार सचिन यादव और राजपाल गौर नामक व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद जबलपुर निवासी डॉक्टर अजय मौर्य और बाद में भोपाल के हीरा सिंह कौशल की गिरफ्तारी हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी फर्जी एमबीबीएस डिग्री और दस्तावेजों के सहारे चिकित्सा क्षेत्र में कार्य कर रहे थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
HR Pandey ने बताया कि फर्जी डॉक्टर बनकर काम कर रहे तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। फिलहाल आदिल खान और हीरा सिंह कौशल से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी डिग्रियां कहां से तैयार की गईं, किन संस्थानों या व्यक्तियों की इसमें भूमिका थी और क्या यह नेटवर्क अन्य जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई विभागों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों में नियुक्तियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं होती तो फर्जी डिग्रीधारी लंबे समय तक मरीजों का इलाज करते रहते, जिससे गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।
फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।