बीडी शर्मा | दमोह।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में उपचुनाव के दौरान ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र कुम्हारी के अंतर्गत आने वाले घुघरा गांव के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण नहीं होने से नाराज होकर उपचुनाव का बहिष्कार कर दिया। गांव तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों ने मतदान न करने का फैसला लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि घुघरा गांव में आने-जाने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी चुनाव के दौरान मतदान का बहिष्कार किया था।

पहले आश्वासन, फिर भी अधूरा काम
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चुनाव में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने समझाइश दी थी कि सड़क निर्माण जल्द कराया जाएगा। उस समय गांव वालों ने भरोसा कर मतदान किया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
सरपंच द्वारा भी सड़क निर्माण को लेकर शासन और प्रशासन से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कागजों में प्रक्रिया चलती रही, जबकि धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
टेंडर हुआ, लेकिन काम शुरू नहीं
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बीते कई वर्षों से निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ टेंडर होने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक मौके पर सड़क नहीं बनेगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
पगडंडी के सहारे जीवन
घुघरा गांव के लोग आज भी पगडंडी के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों का इलाज और खेती से जुड़े काम सभी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता आते हैं, आश्वासन देते हैं और फिर सब कुछ भूल जाते हैं।
ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश
इस बार ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया है—
“जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक वोट नहीं देंगे।”
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के नाम पर सिर्फ वादे नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहते हैं। चुनाव के समय ही उनकी सुध ली जाती है, बाकी समय उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है।
प्रशासन के लिए चुनौती
उपचुनाव के बहिष्कार से प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों की नाराजगी यह साफ संदेश दे रही है कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक घुघरा गांव को पक्की सड़क की सौगात मिल पाती है।