दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक पुराने मकान की खुदाई के दौरान ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्के मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मामला उस समय और चर्चाओं में आ गया जब मजदूरों ने आरोप लगाया कि खुदाई में केवल कुछ सिक्के नहीं बल्कि 35 किलो से अधिक चांदी के सिक्के और चांदी की रॉड निकली थीं, जिन्हें मकान मालिक बाल्टी में भरकर अपने साथ ले गया। विवाद बढ़ने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के दौरान कुल 102 ब्रिटिशकालीन सिल्वर कॉइन बरामद किए गए। पुलिस ने मकान मालिक आलोक सोनी के खिलाफ दफिना एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार दोपहर की बताई जा रही है। दमोह शहर में स्थित एक पुराने पैतृक मकान में निर्माण कार्य चल रहा था। मकान में पिलर की खुदाई के दौरान मजदूरों को मिट्टी के अंदर पीतल का एक कलश दिखाई दिया। मजदूरों ने जब उसे बाहर निकाला तो उसमें एक चांदी का सिक्का मिला। इसके बाद आगे खुदाई करने पर बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के और कुछ चांदी की रॉड निकलने लगीं।

मजदूरों के मुताबिक, खुदाई में निकली चांदी देखकर सभी लोग हैरान रह गए। मजदूर हीरा पटेल ने बताया कि जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, वैसे-वैसे मिट्टी से लगातार चांदी के सिक्के निकलते गए। उनका आरोप है कि मकान मालिक आलोक सोनी ने तुरंत सभी सिक्के और चांदी की सामग्री बाल्टी में भरकर अपने कब्जे में ले ली। मजदूरों का कहना है कि जब उन्होंने हिस्सेदारी मांगी तो उन्हें केवल 500 रुपए देकर वहां से भगा दिया गया।
इसके बाद मजदूर गांव पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी पूर्व सरपंच मुरारी तिवारी को दी। सूचना मिलते ही मामला पुलिस तक पहुंचा। रविवार को कोतवाली थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। इस दौरान कोतवाली टीआई मनीष कुमार, तहसीलदार रोबिन सिंह और नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस जांच में शुरुआत में मकान मालिक के पास से 42 चांदी के सिक्के बरामद हुए। हालांकि मजदूरों के दावे और पूछताछ के बाद पुलिस ने दोबारा तलाशी ली, जिसमें 60 और सिक्के बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि कुछ सिक्के सामने बने मकान में स्टील के डिब्बे में छिपाकर रखे गए थे।

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बरामद सिक्के ब्रिटिशकालीन हैं और इन पर महारानी विक्टोरिया तथा जॉर्ज पंचम की तस्वीर बनी हुई है। शुरुआती जांच में इन्हें 18वीं और 19वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। हालांकि सिक्कों की वास्तविक ऐतिहासिक और आर्थिक कीमत का आकलन अभी नहीं किया गया है।
मजदूरों का दावा है कि बरामद सिक्कों की संख्या पुलिस द्वारा बताई गई संख्या से कहीं अधिक थी। उनका कहना है कि मौके से करीब 35 किलो चांदी के सिक्के और चांदी की रॉड निकली थीं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मामले को लेकर सीएसपी एचआर पांडे ने बताया कि मजदूरों की शिकायत के आधार पर जांच की गई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में मकान मालिक ने केवल 42 सिक्के मिलने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में तलाशी के दौरान 60 और सिक्के बरामद हुए। जांच में यह भी सामने आया कि मकान मालिक ने प्रशासन को सूचना नहीं दी और सिक्के जमा करवाने के बजाय उन्हें छिपाने का प्रयास किया।
पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार की ऐतिहासिक या पुरातात्विक सामग्री मिलने पर उसकी जानकारी प्रशासन और पुरातत्व विभाग को देना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं करने और तथ्य छिपाने के कारण मकान मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
वहीं मकान मालिक आलोक सोनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि खुदाई में केवल 42 सिक्के ही मिले थे और मजदूर ज्यादा हिस्सा लेने के लिए 35 किलो चांदी मिलने जैसी झूठी बातें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका पैतृक मकान है और मजदूर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच रहे हैं और ब्रिटिशकालीन सिक्कों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। वहीं पुरातत्व विभाग अब यह जांच करने की तैयारी में है कि कहीं उस क्षेत्र में और भी ऐतिहासिक सामग्री तो मौजूद नहीं है।
दमोह में सामने आया यह मामला न केवल ऐतिहासिक महत्व का माना जा रहा है, बल्कि इसने पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की विस्तृत जांच में जुटे हुए हैं।