“जल स्रोत बचेंगे तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा”: बेलाताल तालाब पर मंत्री-विधायक ने किया श्रमदान, तीन महीने चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान !

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दमोह। गंगा दशमी के अवसर पर दमोह जिले के ऐतिहासिक बेलाताल तालाब परिसर में सोमवार सुबह जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश देने के लिए “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के पशुपालन राज्यमंत्री लखन पटेल, विधायक जयंत कुमार मलैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान सभी ने बेलाताल तालाब परिसर में साफ-सफाई और श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर तालाब क्षेत्र में मौजूद गंदगी हटाई गई और लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने आसपास मौजूद जल संरचनाओं को सुरक्षित रखने और स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करेंगे।

तीन महीने तक चलेगा अभियान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में मौजूद जल संरचनाओं को संरक्षित करना और पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष यह अभियान करीब डेढ़ महीने तक चलाया गया था, लेकिन इस बार इसकी अवधि बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई है ताकि अधिक से अधिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार जल संरक्षण को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। गांवों और शहरों में मौजूद प्राचीन बावड़ियां, कुएं, तालाब और अन्य जल संरचनाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ भविष्य की जल सुरक्षा का आधार भी हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।

प्राचीन बावड़ियों के संरक्षण पर जोर

मंत्री लखन पटेल ने जिले की कई ऐतिहासिक जल संरचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किशनगंज क्षेत्र में कई प्राचीन बावड़ियां मौजूद हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने पटेरा क्षेत्र की एक प्राचीन बावड़ी का जिक्र करते हुए बताया कि वहां बड़ी मात्रा में कचरा जमा मिला था। उन्होंने कहा कि उस बावड़ी की सफाई और संरक्षण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जल स्रोत केवल पानी का साधन नहीं बल्कि समाज की धरोहर हैं। यदि इन्हें संरक्षित किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने गांव और मोहल्लों में मौजूद तालाबों, कुओं और बावड़ियों की सफाई और संरक्षण में आगे आएं।

“जल संरचनाएं सुरक्षित रहेंगी तो भविष्य खुशहाल होगा”

कार्यक्रम में उपस्थित कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि गंगा दशहरा का पर्व केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह हमें प्रकृति और जल के प्रति अपने कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। उन्होंने कहा कि यदि हम आज अपनी जल संरचनाओं को सुरक्षित रखेंगे तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल रहेगा।

कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने लोगों से जल बर्बादी रोकने और वर्षा जल संरक्षण जैसे उपाय अपनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में मौजूद प्राचीन जल स्रोतों की सूची तैयार कर उनके संरक्षण और सफाई के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

विधायक जयंत मलैया ने बताया सरकार की प्राथमिकता

विधायक जयंत कुमार मलैया ने कहा कि प्रदेश सरकार का पूरा प्रयास है कि पुराने जल स्रोतों को संरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में लोगों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि तालाब, बावड़ियां और कुएं कभी गांवों और शहरों की जीवनरेखा हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ कई संरचनाएं उपेक्षा का शिकार हो गईं।

उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” का उद्देश्य केवल सफाई अभियान चलाना नहीं बल्कि लोगों के मन में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

श्रमदान के जरिए दिया गया संदेश

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने खुद तालाब परिसर में श्रमदान कर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि जल संरक्षण केवल भाषणों से नहीं बल्कि जमीन पर कार्य करने से संभव है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और युवाओं की भागीदारी देखने को मिली।

बेलाताल तालाब पर आयोजित यह अभियान जिले में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार लगातार अभियान चलाए गए और समाज की सहभागिता बनी रही तो आने वाले समय में जल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

प्रदेशभर में चलाया जा रहा “जल गंगा संवर्धन अभियान” अब धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से लोग अपने आसपास की जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए आगे आएंगे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल स्रोत सुरक्षित रखे जा सकेंगे।

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