मध्यप्रदेश के दमोह जिले के बटियागढ़ क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक आवारा गाय ने 4 वर्षीय मासूम बच्चे पर हमला कर दिया। इस हमले में बच्चे के सिर में गंभीर चोट आई है, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
घटना शनिवार दोपहर की बताई जा रही है। घायल बालक की पहचान रोशन अहिरवार (4) के रूप में हुई है, जो अपने घर के बाहर खेल रहा था। परिजनों के अनुसार, रोशन खेलते-खेलते एक आवारा गाय के पास पहुंच गया और मासूमियत में उसे रोटी खिलाने लगा। गाय ने पहले शांतिपूर्वक रोटी खा ली, जिससे बच्चे को कोई खतरा महसूस नहीं हुआ। लेकिन कुछ ही देर बाद जब रोशन दोबारा गाय के करीब गया, तो अचानक गाय ने आक्रामक रूप धारण कर लिया और उस पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गाय ने अपने सींग से रोशन के सिर पर जोरदार वार किया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा और बुरी तरह घायल हो गया। बच्चे की चीख सुनकर उसकी मां पूजा अहिरवार तुरंत घर से बाहर दौड़ीं। उन्होंने देखा कि उनका बेटा खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ है। यह दृश्य देखकर वह घबरा गईं, लेकिन हिम्मत जुटाते हुए उन्होंने सबसे पहले गाय को वहां से भगाया और फिर घायल बच्चे को गोद में उठाकर इलाज के लिए ले गईं।
रोशन को पहले बटियागढ़ के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। लेकिन सिर में गहरी चोट होने के कारण उसकी हालत गंभीर बनी रही। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल दमोह रेफर कर दिया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

रोशन के पिता विनोद अहिरवार ने बताया कि उनका बेटा चार बच्चों में सबसे छोटा है और पूरे परिवार का लाडला है। इस घटना के बाद परिवार में दहशत और चिंता का माहौल है। माता-पिता अपने बच्चे की हालत को लेकर बेहद परेशान हैं और उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के सिर में गंभीर चोट आई है और उसकी स्थिति अभी नाजुक बनी हुई है। उसे लगातार निगरानी में रखा गया है और हर संभव उपचार किया जा रहा है।
इस घटना के बाद इलाके में आवारा पशुओं को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवारा गाय और अन्य पशु खुलेआम घूमते रहते हैं, जो कभी भी आक्रामक हो सकते हैं। कई बार पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि सड़कों और मोहल्लों में घूम रहे पशु बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों के व्यवहार को समझना जरूरी है, क्योंकि कभी-कभी शांत दिखने वाले पशु भी अचानक आक्रामक हो सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों को ऐसे पशुओं से दूर रखने की जरूरत है और उन्हें जागरूक किया जाना चाहिए कि वे अकेले किसी भी जानवर के पास न जाएं।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आवारा पशुओं के प्रबंधन पर ध्यान देना आज की बड़ी जरूरत बन गया है।
फिलहाल, सभी की नजरें रोशन की हालत पर टिकी हुई हैं और लोग उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि छोटी-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।