दमोह रेलवे स्टेशन पर फटा तिरंगा लहराता रहा, देर से जागे जिम्मेदार; सुबह उतारा गया ध्वज !

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मध्यप्रदेश के दमोह में स्थित दमोह रेलवे स्टेशन पर राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार शाम से लेकर शनिवार सुबह तक स्टेशन परिसर में फटा हुआ तिरंगा लहराता रहा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया। बाद में सूचना मिलने पर शनिवार सुबह करीब 10 बजे ध्वज को उतारा गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण स्टेशन के बाहर फहरा रहा तिरंगा क्षतिग्रस्त हो गया था। तेज हवाओं के चलते झंडा फट गया, लेकिन इसके बावजूद उसे पूरी रात उसी अवस्था में फहरने दिया गया। रात 12 बजे और शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे तक भी तिरंगा फटा हुआ ही देखा गया, जो स्पष्ट रूप से लापरवाही को दर्शाता है।

राष्ट्रीय ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आन-बान-शान और सम्मान का प्रतीक होता है। भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, यदि तिरंगा किसी भी कारण से फट जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे तुरंत सम्मानपूर्वक उतारकर सुरक्षित रखा जाना चाहिए। फटे या गंदे झंडे को फहराना नियमों के खिलाफ है और इसे राष्ट्रध्वज का अपमान माना जाता है।

स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों ने भी इस लापरवाही को देखा, लेकिन उनकी शिकायत संबंधित अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंच सकी। यह भी एक बड़ी चिंता का विषय है कि इतने व्यस्त सार्वजनिक स्थल पर इस तरह की स्थिति कई घंटों तक बनी रही और किसी जिम्मेदार कर्मचारी ने इसे सुधारने की पहल नहीं की।

मामले की जानकारी जब मधुर वर्मा (सीडीएम, जबलपुर रेलवे) को दी गई, तो उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया और तुरंत संबंधित अधिकारियों से बात करने की बात कही। इसके बाद हरकत में आए रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शनिवार सुबह लगभग 10 बजे तिरंगे को उतार लिया।

वहीं स्टेशन प्रबंधक मुकेश जैन ने भी पुष्टि की कि फटे हुए तिरंगे को सुबह उतार लिया गया है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि इतनी लंबी अवधि तक यह लापरवाही क्यों बनी रही और जिम्मेदार लोग समय पर सक्रिय क्यों नहीं हुए।

यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को भी दर्शाती है। सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसकी सही देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं कहीं न कहीं व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

आवश्यक है कि इस मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की अस्मिता और सम्मान का प्रतीक है, जिसकी रक्षा करना हर नागरिक और अधिकारी की जिम्मेदारी है।

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