निलेश आदिवासी सुसाइड केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, पूर्व गृहमंत्री की भूमिका SIT जांच के दायरे में !

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सागर। बहुचर्चित निलेश आदिवासी सुसाइड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले की परिस्थितियां निष्पक्ष, स्वतंत्र और विशेषज्ञ जांच की मांग करती हैं, जो स्थानीय पुलिस से संभव नहीं है। इसलिए जांच अब SIT के माध्यम से होगी।

दो दिन में SIT गठित कर एक माह में जांच पूरी करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि—

  • दो दिन के भीतर SIT का गठन हो
  • SIT FIR 329/2025 सहित समस्त रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले
  • जांच तुरंत शुरू कर एक माह में पूरी की जाए
  • निलेश की पत्नी रेवाबाई और अन्य गवाहों को किसी भी तरह की धमकी या प्रभाव से बचाया जाए
  • विटनेस प्रोटेक्शन नियम लागू हों
  • निलेश के भाई नीरज आदिवासी या परिवार पर किसी भी दमनात्मक कार्रवाई पर रोक रहे

कोर्ट ने कहा कि इस मामले की संवेदनशीलता और उच्च स्तर पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए किसी भी प्रकार का दबाव मुक्त वातावरण आवश्यक है।


ऐसी होगी SIT की संरचना

सुप्रीम कोर्ट ने SIT की संरचना भी खुद तय की है—

  1. प्रमुख: एमपी कैडर के बाहर से आया सीधी भर्ती वाला सीनियर सुपरिटेंडेंट रैंक का IPS अधिकारी
  2. दूसरा सदस्य: युवा IPS अधिकारी, जिसकी जड़ें मध्यप्रदेश में न हों
  3. तीसरा सदस्य: डिप्टी एसपी या उससे उच्च रैंक की महिला पुलिस अधिकारी

यह पहली बार है जब कोर्ट ने स्पष्ट रूप से SIT के सदस्यों की प्रोफ़ाइल तय की है, ताकि जांच पर किसी भी तरह की राजनीतिक या स्थानीय प्रभाव की आशंका न रहे।


पत्नी ने पूर्व गृहमंत्री पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे

25 जुलाई को सागर जिले के मालथौन क्षेत्र में 42 वर्षीय निलेश आदिवासी ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
पत्नी रेवाबाई आदिवासी ने आरोप लगाया कि उनके पति को राज्य के पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

रेवाबाई ने 27 जुलाई और 3 अगस्त 2025 को थाने में शिकायतें दी थीं, लेकिन कार्रवाई न होने पर हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।


भाई ने अन्य नामों का उल्लेख किया था

निलेश के भाई नीरज आदिवासी ने पुलिस को दिए बयान में अलग आरोप लगाते हुए स्थानीय बीजेपी नेता गोविंद सिंह राजपूत सहित कुछ अन्य लोगों को जिम्मेदार ठहराया।
इसके बाद पुलिस ने गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ केस दर्ज किया, जिन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई।
वर्तमान में उनकी याचिका और रेवाबाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त सुनवाई चल रही है।


अब क्या आगे होगा?

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित SIT—

  • दोनों पक्षों के आरोपों की जांच करेगी
  • सभी दस्तावेज, बयान और कॉल रिकॉर्ड जैसे तकनीकी साक्ष्य जुटाएगी
  • एक माह में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी

यह मामला अब मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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