बीना के पास खुरई क्षेत्र में नेशनल हाईवे-44 पर गुरुवार को आम से भरे एक ट्रक में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया और उसमें लदे आम जलकर खराब हो गए। घटना के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि चालक की सूझबूझ से उसकी जान बच गई। हादसे ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा व्यवस्था और टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चलते ट्रक से उठने लगा धुआं
जानकारी के अनुसार ट्रक चालक इरशाद खान दक्षिण भारत के तिरुपति क्षेत्र से आम भरकर दिल्ली जा रहा था। ट्रक नेशनल हाईवे-44 से होकर गुजर रहा था। जब वाहन मालथौन थाना क्षेत्र के पास पहुंचा, तभी चालक को ट्रक से धुआं निकलता दिखाई दिया।

शुरुआत में चालक को लगा कि शायद इंजन में मामूली तकनीकी खराबी है, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं तेजी से बढ़ने लगा। स्थिति को गंभीर देखते हुए चालक ने तुरंत ट्रक को सड़क किनारे रोक दिया।
कुछ ही देर में आग की लपटों में घिरा ट्रक
ट्रक रुकते ही आग ने अचानक विकराल रूप ले लिया। इंजन के हिस्से से उठी चिंगारियां देखते ही देखते पूरे वाहन में फैल गईं। आग इतनी तेज थी कि ट्रक में रखी आम की केरेटें भी उसकी चपेट में आ गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही मिनटों में ट्रक आग के गोले में बदल गया। सड़क पर दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि हाईवे से गुजर रहे वाहन चालकों ने अपने वाहन रोक दिए।
चालक ने कूदकर बचाई जान
चालक इरशाद खान ने बताया कि धुआं निकलते ही उन्होंने तुरंत ट्रक सड़क किनारे लगाया और वाहन से दूर हट गए। इसी वजह से उनकी जान बच सकी। यदि कुछ मिनट की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। माना जा रहा है कि ट्रक के इंजन या वायरिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण चिंगारी निकली, जिसने आग का रूप ले लिया।
दमकल को आग बुझाने में करनी पड़ी भारी मशक्कत
घटना की सूचना मिलने के बाद मालथौन और बरोदिया कलां नगर परिषद की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने काफी देर तक मशक्कत कर आग पर काबू पाया।

आग इतनी तेज थी कि ट्रक का अधिकांश हिस्सा जलकर क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रक में लदे आम भी आग और धुएं के कारण खराब हो गए। हादसे के दौरान हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतार लग गई।
टोल प्लाजा की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना के बाद हाईवे पर स्थित टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी दिखाई दी। बताया जा रहा है कि जहां हादसा हुआ वह स्थान टोल प्लाजा से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर था, लेकिन राहत सहायता पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स वसूलने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल शुल्क लेना नहीं, बल्कि दुर्घटना या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना भी है।
ग्रामीणों और वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते मदद पहुंच जाती तो ट्रक और उसमें भरे माल को काफी हद तक बचाया जा सकता था।
आम निकालने पहुंचे लोग, लगी भीड़
जब आग पर काबू पा लिया गया और ट्रक से आम की केरेटें बाहर निकाली जाने लगीं, तब मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। बच्चे और आसपास के लोग आम लेने के लिए ट्रक के पास पहुंचने लगे।

कुछ देर तक वहां अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। पुलिस और स्थानीय लोगों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की ताकि किसी प्रकार की दूसरी दुर्घटना न हो।
हाईवे सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर नेशनल हाईवे-44 पर सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि हाईवे पर नियमित रूप से भारी वाहन चलते हैं, लेकिन दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव व्यवस्था बेहद कमजोर दिखाई देती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि टोल प्लाजा के पास फायर सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में समय रहते सहायता मिल सके।
पुलिस कर रही जांच
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन ट्रक और माल को भारी नुकसान हुआ है।