छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तैनात आरपीएफ के प्रधान आरक्षक पीके मिश्रा की उनके ही पुराने साथी केएस लदेर ने गोली मारकर हत्या कर दी। बुधवार तड़के आरपीएफ पोस्ट में हुए इस हत्याकांड ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार शाम जब जवान का पार्थिव शरीर रीवा पहुंचा, तो घर में चीख-पुकार मच गई।


शुक्रवार सुबह मिश्रा को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। 19 वर्षीय बेटे दीप ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। पत्नी शशिकला बेसुध रहीं, जबकि 15 वर्षीय बेटी दीपिका लगातार रोती रही। भाई रामकिशोर ने रोते हुए कहा— “जिस दोस्त पर जान छिड़कता था, उसी ने गैंगस्टर की तरह मेरे भाई को चार गोलियां मार दीं… उसे फांसी होनी चाहिए।”
जांच में सामने आया कि मामूली विवाद के बाद आरोपी ने मालखाना से पिस्टल निकालकर मिश्रा पर चार गोलियां दाग दीं— जिनमें तीन सिर और गले को आर-पार कर गईं। फायरिंग के वक्त पोस्ट का कांच टूट गया और तीन खाली खोखे मिले। आरोपी मौके से ही गिरफ्तार किया गया।


पत्नी शशिकला बोलीं— “बच्चों की पढ़ाई, सपने, खुशियां… सब कुछ उन्हीं के साथ खत्म हो गया।” दोनों आरक्षक 2002 बैच के थे और एक-दूसरे को ‘मितान’ कहते थे। फरवरी 2026 में दोनों का ट्रांसफर होना था, लेकिन उससे पहले ही दोस्ती खून में बदल गई।
आरोपी लदेर का विवादों से पुराना संबंध रहा है। 2019 में उसने अपने पोस्ट प्रभारी को तलवार से धमकाया था और दो साल जेल में रहा था। अब RPF और पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।