पुरुषोत्तम मास में पशुपतिनाथ मंदिर में सजेगा भक्ति का दरबार, 2 जून से शुरू होगी श्रीमद्भागवत कथा !

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सागर। पशुपतिनाथ मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर 2 जून से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का माहौल बना हुआ है। कथा आयोजन के दौरान प्रतिदिन भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा।

जानकारी देते हुए शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि कथा प्रारंभ होने से पहले 2 जून की सुबह 9:30 बजे भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर शामिल होंगी। धार्मिक ध्वज, भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों के साथ यह यात्रा क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगी।

उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 2 जून से 8 जून तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10:30 बजे तक किया जाएगा। कथा का वाचन प्रसिद्ध कथा व्यास विपिन बिहारी महाराज द्वारा किया जाएगा। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों, धर्म, भक्ति, ज्ञान, कर्म और मानव जीवन के आदर्श मूल्यों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।

कथा आयोजन के यजमान महेशचंद दुबे, केशवप्रसाद गांधी एवं रामप्रकाश श्रीवास्तव रहेंगे। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि कथा श्रवण के दौरान भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

9 जून को कथा समापन के अवसर पर हवन, पूर्णाहुति एवं प्रसादी वितरण का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त करेंगे। आयोजकों के अनुसार कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। भक्तों द्वारा मंदिर का रंग-रोगन कराया गया है और भगवान पशुपतिनाथ का विशेष शृंगार भी किया गया है। भगवान को पीतल की जलहरी और नाग अलंकरण से सजाया गया है, जिससे मंदिर की भव्यता और दिव्यता और अधिक बढ़ गई है। शाम के समय मंदिर परिसर रोशनी और सजावट से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पुरुषोत्तम मास को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना, कथा श्रवण, जप-तप और दान का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि इस अवधि में विभिन्न धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इनमें भाग लेते हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। कथा के माध्यम से लोगों को धर्म, संस्कार और मानव जीवन के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने और धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है। पूरे क्षेत्र में आयोजन को लेकर उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है तथा भक्तजन कथा प्रारंभ होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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