मरामाधौ गांव में कोयापुणेम गौड़ी धर्म दर्शन कथा जारी, संस्कृति संरक्षण का दिया जा रहा संदेश !

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सागर। मरामाधौ गांव में आयोजित सात दिवसीय कोयापुणेम गौड़ी धर्म दर्शन कथा के माध्यम से आदिवासी समाज की विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का विशेष वातावरण देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में समाजजन और ग्रामीण शामिल हुए।

यह कथा आयोजन गौड़ी धर्माचार्य दादा गुरु प्रेमसिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कथा के दौरान समाज को अपनी परंपराओं, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है। शुक्रवार को कथा के पांचवें दिन दादा गुरु प्रेमसिंह ने समाज में बढ़ती सांस्कृतिक दूरी और नई पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज सत्संग, संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है, जिसका असर नई पीढ़ी पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। युवाओं में नशे और गलत आदतों की बढ़ती प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहेगा तो आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा मिल सकेगी।

दादा गुरु प्रेमसिंह ने अपने प्रवचन में गौड़ समाज के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश के बड़े हिस्से पर गौड़ समाज का प्रभाव था और उस क्षेत्र को गौडवाना के नाम से जाना जाता था। लेकिन समय के साथ समाज अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से दूर होता चला गया। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी भाषा, रीति-रिवाज, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए सुनील जैन का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। गांव पहुंचने पर समाजजनों और ग्रामीणों ने माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया। कथा स्थल पर पारंपरिक माहौल और सामाजिक एकता का विशेष दृश्य देखने को मिला।

पूर्व विधायक सुनील जैन ने अपने संबोधन में कहा कि उनका ग्रामीणों और क्षेत्र की जनता से वर्षों पुराना आत्मीय संबंध है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों का स्नेह और अपनापन उन्हें हमेशा भावुक कर देता है। उन्होंने समाज की संस्कृति और परंपराओं को बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी पहचान और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की अपील की।

कथा आयोजन के दौरान धार्मिक प्रवचनों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया जा रहा है। समाज में शिक्षा, नशामुक्ति, संस्कार और एकता जैसे विषयों पर भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इस कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज को सांस्कृतिक रूप से जागरूक और संगठित करना भी है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजजन, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे। कथा स्थल पर श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा। ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को अपनी विरासत और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कोयापुणेम गौड़ी धर्म दर्शन कथा अब क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम बनती जा रही है। आयोजन के माध्यम से समाज को अपनी ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक मूल्यों और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, जिसे लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

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