सागर
प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पेयजल योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों और ठेकेदारों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता को पानी उपलब्ध कराने के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो ठेकेदार समय पर काम शुरू नहीं करेंगे या अधूरे कार्य छोड़ेंगे, उनके खिलाफ पेनाल्टी लगाकर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मंत्री श्री राजपूत ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम की योजनाओं की एक-एक कर विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर स्वयं कार्यों की निगरानी करें और ठेकेदारों से समय पर काम पूरा कराएं।
बैठक की विशेष बात यह रही कि मंत्री श्री राजपूत ने केवल विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया, बल्कि मौजूद जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर जमीनी हकीकत जानी। जनप्रतिनिधियों ने पाइपलाइन नहीं बिछने, अधूरे कार्यों और ठेकेदारों की मनमानी जैसी कई समस्याएं मंत्री के सामने रखीं, जिस पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को मौके पर ही सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंत्री श्री राजपूत ने बिजली विभाग और पीएचई विभाग के अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि बिजली की कमी या तकनीकी खराबी के कारण कोई भी नल-जल योजना बंद नहीं होनी चाहिए। जहां-जहां बिजली कनेक्शन या तकनीकी बाधाएं हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो।
उन्होंने जल की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। मंत्री ने निर्देश दिए कि क्षेत्र की सभी पानी की टंकियों की नियमित सफाई और वॉटरप्रूफिंग कराई जाए ताकि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके। साथ ही जिन योजनाओं को तकनीकी कारणों से संशोधित (रिवाइज्ड) किया गया है, उनके बजट और तकनीकी अड़चनों को तत्काल दूर कर कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में मंत्री श्री राजपूत ने एनएचएआई सड़क निर्माण कार्य में लापरवाही को लेकर संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण राहतगढ़ विकासखंड के लगभग 40 से 50 गांवों में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर सभी क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल की जाए।

उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में जहां भी पाइपलाइन लीकेज या खराबी की शिकायत मिले, वहां युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य कराया जाए ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके और लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके।
मंत्री श्री राजपूत ने ग्राम पंचायतों को सुपुर्द की जा चुकी योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए स्थानीय वॉल्व ऑपरेटर्स को तकनीकी प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित समय के अनुसार नियमित जलप्रदाय सुनिश्चित किया जाए ताकि पानी का वितरण व्यवस्थित तरीके से हो सके।
बैठक में विभागीय समन्वय की कमी के कारण लंबे समय से अटके कई प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई। मंत्री श्री राजपूत ने विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बैठाकर कई जटिल मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल कागजी कार्यवाही से काम नहीं चलेगा। यदि जनप्रतिनिधियों से मिली शिकायतों के बावजूद तय समयसीमा में कार्य पूरे नहीं होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। मंत्री ने कहा कि वे 15 दिनों बाद पुनः समीक्षा बैठक लेकर कार्यों की प्रगति जांचेंगे और जिन अधिकारियों या ठेकेदारों द्वारा समयसीमा में सुधार नहीं लाया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में प्रतिभा पाल, जिला पंचायत सीईओ विवेक के वी, सिटी मजिस्ट्रेट गगन बिसेन, एसडीएम अमन मिश्रा, रोहित वर्मा सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल निगम के अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार, नगर परिषद अध्यक्ष, जनपद सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।