प्राकृतिक खेती पर विस्तृत कृषक संगोष्ठी — बंडा के ग्राम सेसई साजी में 140 से अधिक किसानों की भागीदारी !

Spread the love

बंडा (सागर)। कलेक्टर सह अध्यक्ष “आत्मा” गर्वनिंग बोर्ड के निर्देशानुसार एवं परियोजना संचालक आत्मा के मार्गदर्शन में विकासखंड बंडा के ग्राम सेसई साजी में प्राकृतिक खेती विषय पर विकासखंड स्तरीय कृषक संगोष्ठी का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं के रूप में श्री शैलेंद्र सिंह ठाकुर (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र देवरी), डॉ. आशीष त्रिपाठी, विकासखंड तकनीकी प्रबंधक शैलेष पाण्डेय, और श्रीमती निधि पाण्डेय उपस्थित थे। विभागीय कर्मचारी और 140 से अधिक स्थानीय कृषक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन व समापन व्यावहारिक सत्रों के साथ किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों का स्वागत कर और उद्देश्य स्पष्ट करते हुए हुई। श्री शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के राज्य व केन्द्र सरकार के प्रयासों की सराहना की तथा किसानों से आग्रह किया कि वे कम-से-कम अपनी घरेलू जरूरतों के लिए प्राकृतिक खेती अवश्य अपनाएं। उन्होंने पशुपालन विभाग की नई पहल — गोवंश योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि 25 गोवंशों के लिए प्रस्तावित योजनाओं में 10 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता व छूट के प्रावधान हैं, जिससे ग्रामीण पशुपालन मजबूत होगा।

डॉ. आशीष त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के सैद्धान्तिक व व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत व्याख्यान किया। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र और अग्नि-अस्त्र जैसे प्राकृतिक निवारक व पोषण मिश्रणों की रेसिपी, उपयोग और उनके लाभ उदाहरण सहित समझाए। उन्होंने किसानों को खेत-स्तर पर इन जैविक उत्पादों के उपयोग से मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने तथा रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव कम करने के व्यवहारिक सुझाव दिए।

राहुल साहू ने प्राकृतिक व जैविक खेती के व्यावहारिक अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जैविक खेती अपनाने के तौर-तरीके बताए। शैलेष पाण्डेय ने मिट्टी नमूना लेने के वैज्ञानिक तरीके समझाए तथा हर किसान से अपने खेत का मिट्टी परीक्षण कराने का आग्रह किया—जिससे फसल चयन और पोषण प्रबंधन सूचित तरीके से किए जा सकें।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत किसानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कार्यक्रम में रसायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के उपयोग से होने वाले दीर्घकालिक नुकसान पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही नरवाई जलाने की प्रथा से होने वाले पर्यावरणीय एवं कृषि-हानियों के विषय पर भी किसान चेतित किए गए। निधि पाण्डेय ने विभागीय योजनाओं, रबी फसलों के बीज उपलब्धता व नोडल संपर्कों की जानकारी किसानों के साथ साझा की।

कार्यक्रम के अंत में जीवामृत बनाने की लाइव कार्यशाला कराकर सभी किसानों ने स्वयं मिश्रण तैयार करने का अनुभव प्राप्त किया। बीटीएम निधि पाण्डेय ने अतिथियों एवं किसानों का धन्यवाद ज्ञापित किया और आगे प्रशिक्षण, मिट्टी परीक्षण व फॉलो-अप कार्यों के लिए स्थानीय टीमों का गठन करने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

निष्कर्ष व आगे की रूपरेखा:
संगोष्ठी ने प्राकृतिक खेती को जमीन पर उतारने के लेकर स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान किया। किसानों ने अपनी सहभागीता व उत्साह जाहिर किया और स्थानीय स्तर पर जीवामृत उत्पादन, मिट्टी परीक्षण व नेचुरल फार्मिंग अभ्यास अपनाने का संकल्प लिया। परियोजना संचालक आत्मा के निर्देशानुसार आगे के चरणों में प्रशिक्षण शिविर, प्रदर्शन खेत और तकनीकी सहायता केंद्रों के माध्यम से व्यापक विस्तार की योजना प्रस्तावित की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *