भोपाल में फिनिक्स गैस एजेंसी से जुड़ा एक बड़ा उपभोक्ता विवाद सामने आया है, जिसमें होम डिलीवरी के नाम पर उपभोक्ताओं से करीब 10 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली का मामला जांच में सही पाया गया है। बावजूद इसके, अब तक न तो पूरी तरह सख्त कार्रवाई हो सकी है और न ही उपभोक्ताओं को उनका पैसा वापस मिलने की स्पष्ट प्रक्रिया तय हो पाई है।
कैसे हुआ पूरा मामला?
यह विवाद गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी सेवा से जुड़ा है। आरोप है कि फिनिक्स गैस एजेंसी ने उपभोक्ताओं से हर सिलेंडर पर अतिरिक्त 34 रुपये वसूले, जो नियमों के खिलाफ था। जांच में सामने आया कि इस तरह करीब 10 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई।

मामले में यह भी सामने आया कि केवल फिनिक्स ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य एजेंसियों जैसे सिद्धार्थ गैस एजेंसी (कोलार) और सैनी गैस एजेंसी (अयोध्या नगर) में भी गड़बड़ियां पाई गईं।
कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित?
जांच के बाद गैस कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने एजेंसी पर लगभग 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन एजेंसी को पूरी तरह सस्पेंड नहीं किया गया।
इससे स्थिति और विवादास्पद हो गई क्योंकि जहां उपभोक्ताओं से 10 लाख रुपये की वसूली का अनुमान है, वहीं जुर्माना उससे कम लगाया गया। नतीजतन एजेंसी को लगभग 4 लाख रुपये का लाभ बचा हुआ माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपभोक्ताओं से वसूले गए अतिरिक्त पैसे आखिर लौटाएगा कौन और किस प्रक्रिया से यह रिफंड होगा।
लाइसेंस सस्पेंड या सिर्फ बिक्री बंद?
प्रशासन की ओर से 28 अप्रैल को यह जानकारी दी गई थी कि फिनिक्स गैस एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है और करीब 18 हजार उपभोक्ताओं को दूसरी एजेंसियों से जोड़ दिया गया है।
लेकिन दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि वास्तव में लाइसेंस सस्पेंड नहीं किया गया, बल्कि केवल बिक्री पर रोक लगाने की बात दर्ज थी। यही नहीं, कई उपभोक्ताओं को जिन दूसरी एजेंसियों में शिफ्ट किया गया था, वे भी कथित रूप से फिनिक्स से जुड़े नेटवर्क में ही ट्रांसफर कर दिए गए।
निगरानी में लापरवाही के आरोप
मामले में जिला आपूर्ति नियंत्रक शाखा और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी होने के बावजूद नियमित जांच नहीं की गई।
नतीजतन एजेंसी लंबे समय तक नियमों के खिलाफ वसूली करती रही और उपभोक्ता अनजान बने रहे।
प्रशासन और कंपनी का पक्ष
एडीएम प्रकाश नायक के अनुसार मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए नियमानुसार आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्णय के बाद की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि लाइसेंस और बहाली जैसे निर्णय संबंधित कंपनी द्वारा लिए जाते हैं, जबकि जिला प्रशासन की भूमिका सीमित होती है।
सबसे बड़ा सवाल: उपभोक्ताओं का पैसा कैसे मिलेगा वापस?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा यह है कि जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली गई, उन्हें यह पैसा वापस कैसे मिलेगा। फिलहाल न तो कंपनी और न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट रिफंड मैकेनिज्म दिखाई दे रहा है।
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि जब वसूली साबित हो चुकी है, तो केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी राशि उपभोक्ताओं को लौटाई जानी चाहिए।
सिस्टम पर उठ रहे गंभीर सवाल
यह मामला केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। कोलार और अयोध्या नगर की अन्य गैस एजेंसियों में भी गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद पूरे वितरण सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो उपभोक्ताओं के साथ इस तरह की वसूली दोबारा भी हो सकती है।
फिलहाल मामला कोर्ट में लंबित है और अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन उपभोक्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा या यह मामला केवल जुर्माने और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा।