भोपाल के कोलार रोड स्थित इनायतपुर इलाके में बिजली चोरी का ऐसा मामला सामने आया है जिसने बिजली विभाग के अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। दो आलीशान हवेलियों में घरेलू कनेक्शन की आड़ में भारी स्तर पर बिजली का अवैध उपयोग किया जा रहा था। जांच में खुलासा हुआ कि जहां केवल 4 से 4.5 किलोवॉट की अनुमति थी, वहां 50 से 65 किलोवॉट तक का अत्यधिक लोड चलाया जा रहा था।
विजिलेंस टीम की कार्रवाई में यह सामने आया कि बिजली मीटर के साथ छेड़छाड़ कर सीधे सप्लाई ली जा रही थी। कई जगह दीवारों के भीतर से सर्विस केबल को जोड़कर गुप्त तरीके से बिजली चोरी की व्यवस्था बनाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि सुनियोजित तकनीकी तरीके से की जा रही बिजली की हेराफेरी थी।
दो हवेलियों में भारी बिजली खपत का खुलासा
जांच के दौरान पहली कार्रवाई इकबाल खान की हवेली में की गई। यहां केवल 4 किलोवॉट का घरेलू कनेक्शन स्वीकृत था, लेकिन निरीक्षण में 51.17 किलोवॉट का भारी लोड पाया गया।
टीम को मौके पर 6 एयर कंडीशनर, 41 पंखे, 58 एलईडी बल्ब, 8 फ्रीजर-कूलिंग सिस्टम और अन्य हाई-पावर उपकरण चलते मिले। इतनी अधिक खपत किसी छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान के बराबर मानी जाती है। इस मामले में लगभग 7.52 लाख रुपए की बिलिंग की गई है।

दूसरे परिसर में गुफरान खान के यहां 4.5 किलोवॉट की अनुमति के मुकाबले 65.63 किलोवॉट का लोड पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि दीवारों के अंदर छिपी सर्विस केबल में टैपिंग कर अवैध रूप से बिजली ली जा रही थी।
इस परिसर में 8 एयर कंडीशनर, ई-व्हीकल चार्जर, डीप फ्रीजर, वॉटर हीटर और माइक्रोवेव जैसे हाई-पावर उपकरण संचालित पाए गए। इस मामले में 8.94 लाख रुपए का आकलन किया गया है।
बिजली चोरी का तकनीकी तरीका देखकर चौंके अधिकारी
बिजली विभाग की विजिलेंस टीम के अनुसार, आरोपियों ने बेहद चालाकी से मीटर के इनकमिंग साइड में फ्लेक्सिबल कॉपर वायर जोड़कर सीधे सप्लाई ले रखी थी। कुछ जगह दीवारों के भीतर वायरिंग छिपाकर अवैध कनेक्शन बनाए गए थे ताकि बाहर से किसी को शक न हो।
अधिकारियों का कहना है कि यह सामान्य गलती या लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित बिजली चोरी का नेटवर्क प्रतीत होता है, जिसमें तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग किया गया।
तीसरे मामले में टीम को देख भागे लोग
जांच के दौरान एक अन्य परिसर में कार्रवाई के लिए टीम पहुंची, जहां मशरूर खान के नाम से जुड़े स्थान पर ताला लगा मिला और लोग मौके से गायब हो गए।
विजिलेंस टीम ने पड़ोसी मकान की छत के जरिए संदिग्ध केबल तक पहुंच बनाई और अवैध लाइन काट दी। मौके से केबल जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया।
बिजली विभाग ने इस पूरे अभियान में कुल 19 प्रकरण दर्ज किए हैं और विद्युत अधिनियम की धारा-135 के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
कुल 41 मामलों में 31 लाख से ज्यादा की वसूली
बिजली कंपनी के अनुसार इनायतपुर क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान में कुल 41 मामलों में 31.36 लाख रुपए की वसूली तय की गई है। कई अन्य मामलों की जांच अभी जारी है और संभावना है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
4 किलोवॉट बनाम 65 किलोवॉट: कितना बड़ा अंतर?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, 4 से 5 किलोवॉट का घरेलू कनेक्शन सामान्य घर के लिए पर्याप्त होता है, जिसमें पंखे, फ्रिज, टीवी, कूलर जैसे उपकरण आराम से चल सकते हैं।
लेकिन 50 से 65 किलोवॉट का लोड किसी छोटे होटल, मिनी इंडस्ट्री या बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान के बराबर होता है। इतनी अधिक खपत से ट्रांसफॉर्मर पर दबाव बढ़ता है, जिससे आसपास के इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
सिस्टम पर बढ़ता दबाव और आम उपभोक्ताओं पर असर
अवैध रूप से बिजली खपत केवल राजस्व नुकसान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे वितरण तंत्र पर पड़ता है। ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने से लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और बिजली कटौती जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की चोरी पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त भार पड़ेगा और बिजली व्यवस्था अस्थिर हो सकती है।
बिजली विभाग की सख्त कार्रवाई के संकेत
बिजली कंपनी ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग अब उन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रख रहा है जहां घरेलू कनेक्शन के बावजूद असामान्य रूप से अधिक लोड दर्ज हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि सिस्टम में पारदर्शिता और स्थिरता बनी रहे।