फेसबुक शिकायतों पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन: अधिक दाम पर शराब बेचने वाली दुकान का लाइसेंस निरस्त, आबकारी अधिकारियों को भी फटकार !

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दमोह, जिले में शराब दुकानों की अनियमितताओं को लेकर आम नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया पर लगातार की जा रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्वयं मौके पर पहुंचकर हटा नाका क्षेत्र स्थित एक शराब दुकान का निरीक्षण किया और गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इस कार्रवाई ने न केवल शराब कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब जन शिकायतों को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से जिले के विभिन्न क्षेत्रों से यह शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कई शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है। इसके अलावा अवैध रूप से गांवों तक शराब की आपूर्ति किए जाने और दुकानों के संचालन में नियमों की अनदेखी की बात भी सामने आ रही थी। इन शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा सीधे कलेक्टर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से फेसबुक पेज, पर लोगों द्वारा किया गया था।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आबकारी विभाग को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता आम जनता के हितों की रक्षा करना है और यदि किसी विभाग द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया जाएगा तो जिला प्रशासन सीधे हस्तक्षेप करेगा।

निरीक्षण के दौरान हटा नाका क्षेत्र में संचालित शराब दुकान में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि दुकान निर्धारित स्थान पर संचालित नहीं की जा रही थी। इसके अलावा वहां शराब निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बेची जा रही थी। दुकान परिसर में आवश्यक रेट लिस्ट और सूचना बोर्ड भी उचित तरीके से प्रदर्शित नहीं किए गए थे। रिकॉर्ड संधारण में भी कई कमियां मिलीं, जिससे प्रशासन को संदेह हुआ कि नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा था।

इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने दुकान संचालक के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई अन्य शराब विक्रेताओं के लिए भी एक सख्त संदेश है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि कार्रवाई की शुरुआत आम नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से उठाई गई आवाज से हुई। लोगों ने फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ दुकानों में शराब निर्धारित मूल्य से अधिक दरों पर बेची जा रही है। इन शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय कलेक्टर ने सीधे संज्ञान लिया और जांच करवाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक अधिकारी अब सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त जन शिकायतों को भी गंभीरता से ले रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती, तो उन्हें स्वयं मौके पर जाकर जांच करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले की सभी शराब दुकानों का नियमित निरीक्षण किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

कलेक्टर ने जिले के सभी शराब ठेकेदारों और लाइसेंस धारकों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही दुकानों का संचालन करें। शराब की बिक्री निर्धारित दरों पर ही की जाए तथा सभी आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिले की किसी भी शराब दुकान का औचक निरीक्षण किया जा सकता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से शराब दुकानों में मनमानी कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही थी। अब कलेक्टर द्वारा सीधे हस्तक्षेप कर कार्रवाई किए जाने से आम लोगों में यह विश्वास बढ़ा है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जा रहा है।

कुल मिलाकर, दमोह में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले विभागीय अधिकारियों और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की इस पहल से जिले में शराब बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नियमसम्मत बनाने की उम्मीद बढ़ गई है।

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